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Agromet Advisory (Hindi)

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मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं
ग्रामीण कृषि मौसम सेवा
कृषि भौतिकी संभाग
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली – 110012       
(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website:
www.iari.res.in

साल-21, क्रमांक :- 96/2014-15/शुक्र.                समय:  अपराह्न  2.30 बजे                दिनांक: 27-02-2015

बीते सप्ताह का मौसम (21 से 27 फरवरी, 2015)
             सप्ताह के दौरान आसमान में हल्के बादल दिखाई दिऐ। दिन का अधिकतम तापमान 26.0 से 28.0  डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 23.4 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 8.9 से 16.5 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 9.8 डिग्री सेल्सियस) रहा। इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 85 से 98 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 32 से 65 प्रतिशत दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान दिन में औसत 4.2 घंटे  प्रति दिन (साप्ताहिक सामान्य 7.1 घंटे) धूप खिली रही। हवा की औसत गति 5.6 कि.मी. प्रति घंटा (साप्ताहिक  सामान्य 4.7 कि. मी. प्रति घंटा) तथा वाष्पीकरण की औसत दर  4.1 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 3.7 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न को हवा ज्यादातर शांत रही तथा अपराह्न को भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही।
भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, सफदरजंग विमानपत्तन, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमी तत्व/दिनांक28-02-1501-03-1502-03-1503-03-1504-03-15
वर्षा (मि.मी.)0.02.010.05.00.0
अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}2823222224
न्यूनतम तापमान {° सेल्सियस}1115151211
बादलों की स्थिति (ओक्टा)68852
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम8095958580
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम4050555040
हवा की गति (कि.मी/घंटा)0815201108
हवा की दिशापूर्व-उत्तर-  पूर्वपूर्व-दक्षिण-  पूर्वदक्षिण-दक्षिण-पूर्वपश्चिम-दक्षिण- पश्चिमदक्षिण
विशेष मौसम1 एवं 2 मार्च को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कही-कही वर्षा/ओले गिरने की सम्भावना है। 1 मार्च को लगभग 10.0 मि.मी तथा 2 मार्च को 5.0 मि.मी वर्षा की सम्भावना है।

 

साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह 04 मार्च, 2015 तक के लिए
कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।
1. 1 एवं 2 मार्च को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कही-कही वर्षा/ओले गिरने की सम्भावना है। 1 मार्च को लगभग 10.0 मि.मी तथा 2 मार्च को 5.0 मि.मी वर्षा की सम्भावना को ध्यान में रखते हुए किसान भाईयों को सलाह है कि वे अपने फलवृक्षों तथा पौधशाला को बचाव हेतू जाला (नेट)  से इन्हे ढ़क दे ताकि नुकसान को रोका जा सके । फलवृक्षों, सब्जियों आदि के पौधो को गिरने से बचाने के लिए सहारा दें। कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखे तथा पशुओं को इस दौरान पशुशाला में रखे। 
2. वर्तमान मौसम को ध्यान में रखते हुए किसान भाई सभी सब्जियों तथा सरसों की फसल में चेपा के आक्रमण की निगरानी करें। यदि कीटों क़ी सख्याँ अधिक हो तो नियंत्रण के लिए सब्जियों में इमिडाक्लोप्रिड @ 0.25-0.5 मि.ली./ लीटर पानी की दर से सब्जियों  की तुडाई के बाद आसमान साफ होने पर करें। सब्जियों की फसलों पर छिड़काव के बाद एक सप्ताह तक तुड़ाई न करें। बीज वाली सब्जियों पर चेपा के आक्रमण पर विशेष ध्यान दें।
3. मौसम को ध्यान में रखते हुए गेहूँ की फसल में रोगों, विशेषकर रतुआ की निगरानी करते रहें। काला, भूरा अथवा पीला रतुआ आने पर फसल में डाइथेन एम-45 (2.5 ग्राम/लीटर पानी) का छिड़काव आसमान साफ होने पर करें। पीला रतुआ के लिये 10-20 डिग्री सेल्सियस तापमान उप्युक्त है। 25 डिग्री सेल्सियस तापमान से उपर रोग का  फैलाव नहीं होता। भूरा रतुआ के लिये 15 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ नमी यूक्त जलवायु आवश्यक है। काला रतुआ के लिये 20 डिग्री सेल्सियस से उपर तापमान ओर नमी रहित जलवायु आवश्यक है।
4. फ्रेंच बीन, गर्मी के मौसम वाली मूली इत्यादि की सीधी बुवाई हेतु वर्तमान तापमान अनुकूल है क्योंकि बीजों के अंकुरण के लिए यह तापमान उपयुक्त हैं। किसान उन्नत बीजों को किसी प्रमाणित स्रोत से ही प्राप्त करें।
5. मूंग और उड़द की फसलों की मार्च में बुवाई हेतु किसान भाई किसी प्रमाणित स्रोत से उन्नत बीजों का संग्रह करें। मूंग– पूसा विशाल, पूसा बैसाखी, पी.डी एम-11, एस एम एल-32; उड़द– पंत उड़द-19, पंत उड़द-30, पंत उड़द-35, पी डी यू-1। बुवाई से पूर्व बीजों को फसल विशेष राईजोबीयम तथा फास्फोरस सोलूबलाईजिंग बेक्टीरिया से अवश्य उपचार करें।
6. इस सप्ताह तापमान बढ़ने की संभावना को देखते हुए किसान भाईयों को सलाह है कि भिंडी की ए-4, परबनी क्रांति, अर्का अनामिका आदि किस्मों की बुवाई शुरू करें | बुवाई से पूर्व खेतों में पर्याप्त नमी का ध्यान रखें। बीज की मात्रा 10-15 कि.ग्रा./एकड़।
7. मौसम को ध्यान में रखते हुए किसान टमाटर, मिर्च, कद्दूवर्गीय सब्जियों के तैयार पौधों की रोपाई इस सप्ताह कर सकते हैं।
8. इस मौसम में प्याज की समय से बोयी गई फसल में थ्रिप्स के आक्रमण की निरंतर निगरानी करते रहें। कीट के पाये जाने पर कानफीड़ोर @ 0.5 मिली./ 3 ली. पानी किसी चिपकने वाले पदार्थ जैसे टीपोल आदि(1.0 ग्रा. प्रति एक लीटर घोल) में मिलाकर छिड़काव करें तथा नीला धब्बा रोग की निगरानी करते रहें। रोग के लक्षण पाये जाने पर डाएथेन, एम-45 3 ग्रा./ली. पानी किसी चिपकने वाले पदार्थ जैसे टीपोल आदि(1 ग्रा. प्रति एक लीटर घोल) में मिलाकर छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।
9. टमाटर के फलों को फली छेदक कीट से बचाव हेतु किसान खेत में पक्षी बसेरा लगाए। वे कीट से नष्ट फलों को इकट्ठा कर जमीन में दबा दें। साथ ही फल छेदक कीट की निगरानी हेतु फिरोमोन प्रपंश @ 2-3 प्रपंश प्रति एकड़ की दर से लगाएं।
10. बैंगन की फसल को प्ररोह एवं फल छेदक कीट से बचाव हेतु ग्रसित फलों तथा प्रोरहों को इकट्ठा कर नष्ट कर दें। यदि कीट की संख्या अधिक हो तो स्पिनोसेड कीटनाशी 48 ई.सी. @ 1 मि.ली./4 लीटर पानी की दर से छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।
11. इस मौसम में गेंदे में पूष्प सड़न रोग के आक्रमण की सम्भावना बढ जाती है अत: किसान भाई फसल की निगरानी करते रहें यदि लक्षण दिखाई दें तो बाविस्टिन 1 ग्राम/लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव आसमान साफ होने पर करें।
12. मौसम को ध्यान मे रखते हुए किसान भाईयों को सलाह है कि गेंदे की तैयार पौध की रोपाई करें तथा ग्रीष्मऋतु के लिये पौध (नर्सरी) तैयार करें।
सलाहकार समिति के वैज्ञानिक   
डा. अनन्ता वशिष्ठ (नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग) 
डा.रवीन्द्र सिंह (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)
डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)
डा.जे.पी.एस. ड़बास (प्रधान वैज्ञानिक ,केटेट)
डा.बी.एस.तोमर (प्रधान वैज्ञानिक, बीज उत्पादन इकाई)
डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)
डा.देब कुमार दास (वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)
डा.पी.सिन्हा (प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)