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Agromet Advisory (Hindi)

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मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं
ग्रामीण कृषि मौसम सेवा,
कृषि भौतिकी संभाग
भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली – 110012       
(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website:
www.iari.res.in

 

साल-22, क्रमांक :- 35/2015-16/शुक्र              समयअपराह्न  2.30 बजे                दिनांक: 31-07-2015

बीते सप्ताह का मौसम (25 से 31 जुलाई, 2015)

                 सप्ताह के दौरान आसमान में बादल रहे। 26 जुलाई को 2.4 मि.मी, 27 जुलाई को 6.2 मि.मी, 28 जुलाई को 2.4 मि.मी तथा 31 जुलाई को 2.2 मि.मी वर्षा संस्थान की वैधशाला मे दर्ज की गई। दिन का अधिकतम तापमान 30.0 से 35.0 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 34.1 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 23.6 से 26.7 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 27.0 डिग्री सेल्सियस) रहा। इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 76  से 89 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 56 से 77 प्रतिशत    र्ज की गई। सप्ताह के दौरान दिन में औसत 6.3 घंटे  प्रति दिन (साप्ताहिक सामान्य 6.9 घंटे) धूप खिली रही। हवा की औसत गति 7.2 कि.मी. प्रति घंटा (साप्ताहिक  सामान्य 6.2 कि.मी. प्रति घंटा) तथा वाष्पीकरण की औसत दर 4.8 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 6.6 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न तथा अपराह्न को हवा अधिकतर दक्षिण दिशा से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, सफदरजंग विमानपत्तन, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमी तत्व/दिनांक

01-08-15

02-08-15

03-08-15

04-08-15

05-08-15

वर्षा (मि.मी.)

2.0

5.0

10.0

5.0

10.0

अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}

31

30

31

32

32

न्यूनतम तापमान {° सेल्सियस}

24

24

25

26

25

बादलों की स्थिति (ओक्टा)

8

8

7

7

8

सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

85

95

90

85

90

सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

50

58

60

55

60

हवा की गति (कि.मी/घंटा)

14

13

06

07

09

हवा की दिशा

पश्चिम-दक्षिण- पश्चिम

पश्चिम-दक्षिण- पश्चिम

पूर्व

पश्चिम-दक्षिण- पश्चिम

पूर्व-दक्षिण-पूर्व

साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह 5 अगस्त, 2015 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

1.       जिन किसान भाईयों की फसलें 25 से 30 दिन की हो गई तो खरपतवार नियंत्रण के लिए निराई-गुड़ाई का कार्य करें। वर्षा पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए किसान भाई  सब्जियों, दलहनी फसलों, मक्का तथा पौधशाला में जल निकास की व्यवस्था करें।

2.       जिन किसान भाईयों की धान की फसल 20-25 दिन की हो गई हो तो नत्रजन उर्वरक 30- 40 किलोग्राम/हैक्टर की दर से खेत में डालें

3.       यदि धान की फसल में पत्त्ता मरोंड या तना छेदक कीट का प्रकोप दिखाई दे तो करटाप दवाई 4% दानें 10 किलोग्राम/एकड़ का बुरकाव करें ।

4.       धान की फसल मे यदि पौधों का रंग पीला पड रहा हो तथा पौधे की ऊपरी पत्तियाँ पीली और नीचे की हरी हो तो इसके लिए जिंक सल्फेट(हेप्टा हाइडेट्र 21%) 6.0 किग्रा/हैक्टर की दर से 300 लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करें।

5.       इस मौसम में किसान भाई स्वीट कोर्न (माधुरी, विन ऑरेंज) तथा बेबी कोर्न (एच एम-4) की बुवाई मेड़ों पर करें

6.       इस मौसम में किसान ग्वार (पूसा नव बहार, दुर्गा बहार), मूली (पूसा चेकी), लोबिया (पूसा सुकोमल), सेम (पूसा सेम 2, पूसा सेम 3), पालक (पूसा भारती), चौलाई (पूसा लाल चौलाई, पूसा किरण ) आदि फसलों की बुवाई के लिए खेत तैयार हो तो बुवाई मेड़ों पर करें। बीज किसी प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें।

7.       कद्दूवर्गीय सब्जियों को ऊपर चढाने की व्यवस्था करे ताकि वर्षा से सब्जियों की लताओं को गलने से बचाया जा सके।

8.       कद्दूवर्गीय एवं अन्य सब्जियों में मघुमक्खियों का बडा योगदान है क्योंकि, वे परांगण में सहायता करती है इसलिए जितना संभव हो मघुमक्खियों के पालन को बढ़ावा दें। कीड़ों एवं बीमारियों की निरंतर निगरानी करते रहें, कृषि विज्ञान केन्द्र से सम्पर्क रखें व सही जानकारी लेने के बाद ही दवाईयों का प्रयोग करें। फल मक्खी से प्रभावित फलों को तोड़कर गहरे गड्डे में दबा दें, फल मक्खी के बचाव हेतू खेत में विभिन्न जगहो पर गुड़ या चीनी के साथ मैलाथियान (10%) का घोल बनाकर छोटे कप या किसी और बरतन में रख दें  ताकि फल मक्खी का नियंत्रण हो सके।

9.          इस मौसम में किसान भाई कपास में रस चूसने वाले कीटों तथा मिली बग का प्रकोप दिखाई दे तो किसान भाई प्रभावित पौधों को उखाड़ कर नष्ट कर दें | भेदक कीटों की निगरानी हेतु फिरोमोन प्रपंश 2-3 प्रपंश प्रति एकड़ की दर से लगाएं। रस चूसने वाले कीटों तथा मिली बग की सख्याँ अधिक हो तो बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड़ कीटनाशक 0.5 मि.ली./ली. पानी में मिलाकर छिड़काव मौसम साफ होने पर करें।

10.       जिन किसान भाईयों की हरी प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, बैंगन व अगेत फूलगोभी की पौध तैयार है, वे मौसम को मध्यनजर रखते हुए रोपाई मेड़ों (उथली क्यारियों) पर करें।

11.       किसान भाई इस समय मूली- पूसा चेतकी, वर्षा की रानी समर लोंग, लोंग चेतकी;; पालक- आल ग्रीन, भारती, तथा धनिया- पंत हरितमा या संकर किस्मों की बुवाई करें।

12.       भिंडी, मिर्च तथा बेलवाली फसल में माईट, जैसिड और होपर  की निरंतर निगरानी करते रहें। अधिक कीट पाये जाने पर इमिडाक्लोप्रिड़ 17.8 @ 0.5  मि.ली./लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।

13.       गेदें के फूलों की (पूसा अर्पिता) वर्षाकालीन पौध छायादार जगह पर तैयार करें तथा जल निकास का उचित प्रबन्ध रखे।

14.       फलों के नऐ बाग लगाने का उचित समय है। गड्डों में किसी प्रमाणित स्रोत से पौधे खरीदकर रोपाई करें। किसान भाई  ध्यान रखें कि गड्डों में वर्षा का ज्यादा पानी इकट्ठा न हो सके।

 

15.    वर्षा आधारित एवं बारानी क्षेत्रों में भूमि मे  नमी संचयन के लिए पलवार(मलचिंग) का प्रयोग करना लाभदायक होगा। फसलों में पोटाश उर्वरक का प्रयोग करें इससे फसलों में सुखा सहन करने की शक्ति ज्यादा होती है एवं कीटों व बीमारियों का प्रकोप भी कम होता है। 

डा. अनन्ता वशिष्ठ (नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग) 
डा.देब कुमार दास (वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)
डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)
डा.जे.पी.एस. ड़बास (प्रधान वैज्ञानिक ,केटेट)
डा.बी.एस.तोमर (प्रधान वैज्ञानिक, बीज उत्पादन इकाई)
डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)
डा.पी.सिन्हा (प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)