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Agromet Advisory (Hindi)

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 मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा,

कृषि भौतिकी संभाग

भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in

साल-22, क्रमांक :- 43/2015-16/शुक्र              समयअपराह्न  2.30 बजे                  दिनांक: 28-08-2015

बीते सप्ताह का मौसम (22 से 28 अगस्त, 2015)

                 सप्ताह के दौरान आसमान में बादल रहे। 22 अगस्त को 17.0 मि.मी तथा 24 अगस्त को 49.4 मि.मी वर्षा संस्थान की वैधशाला मे दर्ज की गई। दिन का अधिकतम तापमान 33.0 से 35.4 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 33.4 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 21.8 से 26.5 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 26.0 डिग्री सेल्सियस) रहा। इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 75  से 95 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 57 से 70 प्रतिशत दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान दिन में औसत 7.2 घंटे  प्रति दिन (साप्ताहिक सामान्य 7.4 घंटे) धूप खिली रही। हवा की औसत गति 6.8 कि.मी. प्रति घंटा (साप्ताहिक  सामान्य 5.4 कि.मी. प्रति घंटा) तथा वाष्पीकरण की औसत दर 5.8 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 6.3 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न को हवा अधिकतर पश्चिम दिशा से रही तथा अपराह्न को उत्तर-पश्चिम दिशा से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, सफदरजंग विमानपत्तन, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमी तत्व/दिनांक

29-08-15

30-08-15

31-08-15

01-09-15

02-09-15

वर्षा (मि.मी.)

4.0

2.0

0.0

0.0

0.0

अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}

36

35

36

36

36

न्यूनतम तापमान {° सेल्सियस}

27

28

28

27

27

बादलों की स्थिति (ओक्टा)

4

5

4

4

2

सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

80

80

90

80

80

सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

40

40

50

40

40

हवा की गति (कि.मी/घंटा)

09

12

14

18

16

हवा की दिशा

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम

पश्चिम- दक्षिण-पश्चिम

पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम

पश्चिम

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम

साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह 02 सितम्बर, 2015 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

धान

·         धान की फसल इस समय मुख्यत: वानस्पतिक वृद्वि की स्थिति में है अत: फसल में कीटों की निगरानी करें तना छेदक कीट की निगरानी हेतू फिरोमोन प्रपंच @ 3-4 /एकड़ लगाए। यदि तना छेदक कीट का प्रकोप अधिक हो तो करटाप दवाई 4% दानें या कार्बोफूरान 3% दानें 10 किलोग्राम/एकड़ का बुरकाव या क्लोरपायरिफाँस 20 ई.सी. @ 2 मि. ली./लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

·         इस समय धान की फसल को नष्ट करने वाली ब्राउन प्लांट होपर का आक्रमण आरंभ हो सकता है अतः किसान भाई खेत के अंदर जाकर पौध के निचली भाग के स्थान पर मच्छरनुमा कीट का निरीक्षण करें। यदि प्रकोप दिखाई दें तो इमिडाक्लोप्रिड दवाई 1.0 मि. ली./3 लीटर पानी या फेनोबुकार्ब 50 ई.सी. @ 1 मि. ली./लीटर या बुप्रोफिजिन 25 ई.सी. @ 2 मि. ली./लीटर पानी में मिलाकर छिड़­काव करें।

गन्ना

·         किसान भाईयों को यह सलाह है की वे गन्नें की फसल में खरपतवार नियंत्रण करें। फसल में गूल बनाए (मिट्टी चढायें) तथा गन्नें के पौधों को बांधने का कार्य करें।

·         गन्ने की फसल मे बेधक कीटों के प्रबन्धन के लिए ट्राइको कार्ड का प्रयोग अवश्य करें। यदि प्रकोप अधिक दिखाई दे तो कार्बोफ्युरान दानें का बुरकाव 10 कि.ग्रा/एक की दर से करें।

मक्का

·         मक्का में तना छेदक कीट की निगरानी करें। बचाव के लिए ट्राईको-कार्ड @ 4/ एकड़ का उपयोग करें। यदि प्रकोप अधिक दिखाई दे तो कार्बरिल पाउ 2.0 ग्राम या कार्बोफुरान 3% दानें या फारेट 10% दानें 8.0 किलोग्राम/एकड़ का बुरकाव करें।

दलहनी फसलें

·         मूंग, उडद में यदि सफ़ेद मक्खी या चूसक कीटों का प्रकोप अधिक हो तो इमिडाक्लोप्रिड दवाई 1.0 मि.ली./3 लीटर पानी या ट्राईजोफाँस 40 ई.सी. @ 1 मि.ली./लीटर में मिलाकर छिड़­काव करें।

कपास

·         इस मौसम में किसानों को सलाह है कि, कपास में बेधक कीटों से निगरानी के लिए फिरोमोन प्रपंच @ 3-4/एकड़ का उपयोग कर सकते है यदि  बेधक कीटों का प्रकोप अधिक हो तो स्पेनोसे दवाई 1.0 मि.ली./3 लीटर पानी में मिलाकर छिड़­काव करें।

सब्जियाँ

·   इस मौसम में किसान भाई गाजर की बुवाई मेड़ो पर कर सकते हैं। उन्नत किस्में- पूसा रूधिरा । बीज दर 4.0 कि.ग्रा. प्रति एकड़। बुवाई से पूर्व बीज को केप्टान @ 2 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचार करें तथा खेत में देसी खाद, पोटाश और फास्फोरस उर्वरक अवश्य डालें तथा जल निकास का उचित प्रबंन्ध रखें।

·         सब्जियों में (टमाटर, मिर्च, बैंगन फूलगोभी पत्तागोभी) फल छेदक, शीर्ष छेदक एवं फूलगोभी पत्तागोभी में डायमं बेक मोथ की निगरानी हेतू फिरोमोन प्रपंच @ 3-4/एकड़ लगाए तथा प्रकोप अधिक दिखाई दे तो स्पेनोसे दवाई 1.0 मि.ली./4 लीटर पानी में मिलाकर छिड़­काव करें।

·         इस मौसम में किसानों को सलाह है कि फूलगोभी की पूसा शरद, पूसा हाइब्रिड-2 पंत शुभ्रा की रोपाई हेतु पौध तैयार करना शुरु करें। खरीफ प्याज की तैयार पौध की रोपाई मेड़ों (उथली क्यारियों) पर करें।

·         किसानों को सलाह है कि इस समय सरसों साग-पूसा साग-1, मूली-वर्षा की रानी, समर लोंग, लोंग चेतकी; पालक- आल ग्रीन तथा धनिया-पंत हरितमा या संकर किस्मों की बुवाई मेड़ों (उथली क्यारियों) पर करें।

·         कद्दूवर्गीय एवं अन्य सब्जियों में मघुमक्खियों का बडा योगदान है क्योंकि, वे परांगण में सहायता करती है इसलिए जितना संभव हो मघुमक्खियों के पालन को बढ़ावा दें। कीड़ों एवं बीमारियों की निरंतर निगरानी करते रहें, कृषि विज्ञान केन्द्र से सम्पर्क रखें व सही जानकारी लेने के बाद ही दवाईयों का प्रयोग करें। फल मक्खी से प्रभावित फलों को तोड़कर गहरे गड्डे में दबा दें, फल मक्खी के बचाव हेतू खेत में विभिन्न जगहो पर गुड़ या चीनी के साथ (मैलाथियान 10%) का घोल बनाकर छोटे कप या किसी और बरतन में रख दें  ताकि फल मक्खी का नियंत्रण हो सके।

·         भिंडी, मिर्च तथा बैंगन की फसल में माईट, जैसिड और होपर  की निरंतर निगरानी करते रहें। अधिक माईट पाये जाने पर फासमाईट @ 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी तथा जैसिड और होपर कीट के रोकथाम के लिए रोगोर कीटनाशक @ 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें।

अन्य

·         इस समय फसलों व सब्जियों में दीमक का प्रकोप होने की संभावना रहती है अतः किसान भाई फसल की निगरानी करें यदि प्रकोप दिखाई दे तो क्लोरपाइरीफाँस 20 ई सी @ 4.0 मि.ली/लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें

·         इस मौसम में किसानों को सलाह है कि अपनी फसलों व सब्जियों में निराई-गुडाई का कार्य शीघ्र करें

·         कीटों की रोकथाम के लिए प्रकाश प्रपंश (Light trap) का भी इस्तेमाल कर सकते है। इसके लिए एक प्लास्टिक के टब या किसी बड़े बरतन में पानी और थोडा मिट्टी का तेल या थोडा रोगोर मिलाकर एक बल्ब जलाकर रात में खेत के बीच में रखे दें। प्रकाश से कीट आकर्षित होकर उसी घोल पर गिरकर मर जायेंगें। इस प्रपंश से अनेक प्रकार के हानिकारक कीटों का नाश होगा।

·         फलों के नऐ बाग लगाने के लिए अच्छी गुणवत्ता के पौधों का प्रबन्ध करके इनकी रोपाई अतिशीघ्र करें।

·         गुलदाउदी,गेंदे की तैयार पौध की मेड़ों पर रोपाई करें। ग्लेडिओलस की बीजों द्वारा बुवाई इस समय करें।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक              

डा. अनन्ता वशिष्ठ (नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)                                                                          

डा.देब कुमार दास (वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास (प्रधान वैज्ञानिक ,केटेट)

डा.बी.एस.तोमर (प्रधान वैज्ञानिक, बीज उत्पादन इकाई)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)

     डा.पी.सिन्हा (प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग