Home Daily Weather Data Agromet Advisory (Hindi)

Agromet Advisory (Hindi)

E-mail Print PDF

 

मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं
ग्रामीण कृषि मौसम सेवा
कृषि भौतिकी संभाग
भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली – 110012       
(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website:
www.iari.res.in

साल-22, क्रमांक :- 26/2015-16/मंग.                समयअपराह्न  2.30 बजे                दिनांक: 30-06-2015

बीते सप्ताह का मौसम (24 से 30 जून, 2015)

                सप्ताह के दौरान आसमान में हल्के बादल रहे। 24 जून को 0.8 मि.मी; 25 जून को 30.4 मि.मी तथा 29 जून को 7.8 मि.मी वर्षा संस्थान की वैधशाला मे दर्ज की गई। दिन का अधिकतम तापमान 29.8 से 39.2 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 36.0 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 22.5 से 26.5 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 27.1 डिग्री सेल्सियस) रहा। इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 65  से 98 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 44 से 87 प्रतिशत दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान दिन में औसत 6.3 घंटे  प्रति दिन (साप्ताहिक सामान्य 5.9 घंटे) धूप खिली रही। हवा की औसत गति 7.6 कि.मी. प्रति घंटा (साप्ताहिक  सामान्य 7.1 कि.मी. प्रति घंटा) तथा वाष्पीकरण की औसत दर 6.9 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 8.2 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न तथा अपराह्न को हवा भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, सफदरजंग विमानपत्तन, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमी तत्व/दिनांक

01-07-15

02-07-15

03-07-15

04-07-15

05-07-15

वर्षा (मि.मी.)

1.0

0.0

0.0

0.0

0.0

अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}

38

39

40

40

40

न्यूनतम तापमान {° सेल्सियस}

25

24

24

24

23

बादलों की स्थिति (ओक्टा)

3

4

3

4

4

सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

80

75

75

80

85

सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

45

40

40

45

50

हवा की गति (कि.मी/घंटा)

10

10

08

10

10

हवा की दिशा

पश्चिम- दक्षिण-पश्चिम

पश्चिम- दक्षिण-पश्चिम

दक्षिण

दक्षिण

पश्चिम-दक्षिण- पश्चिम

साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह 5 जुलाई, 2015 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

  1. जिन किसान भाईयों की धान की नर्सरी 20-25 दिन की हो गई हो वे इस समय धान की रोपाई उन क्षेत्रों में करें जहाँ पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 20 सेमी तथा पौध से पौध की दूरी 10 सेमी रखें। उर्वरकों में 100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस, 40 किलोग्राम पोटाश और 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट/ हैक्टर की दर से डाले, तथा नील हरित शैवाल एक पेकेट/एकड़ का प्रयोग उन्ही खेतो में करें जहाँ पानी खड़ा रहता हो, ताकि मृदा में नाइट्रोजन की मात्रा बढाई जा सकें।
  2. धान की पौधशाला मे यदि पौधों का रंग पीला पड रहा है तो इसमे लौह तत्व की कमी हो सकती हैं । पौधों की यदि ऊपरी पत्तियॉ पीली और नीचे की हरी हो तो यह लोंह तत्व की कमी दर्शाता है । इसके लिए 0.5 % फेरस सल्फेट +0.25 % चूने के घोल का छिडकाव आसमान साफ होने पर करें।
  3. वर्तमान मौसम को ध्यान में रखते हूये किसान भाई इस सप्ताह मक्का की बुवाई शुरु कर सकते है । संकर किस्में ए एच-421 व ए एच-58 तथा उन्नत किस्में पूसा कम्पोजिट-3, पूसा कम्पोजिट-4 की बुवाई शुरु कर सकते है। बीज की मात्रा 20 किलोग्राम/हैक्टर रखें। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 60-75 से.मी. तथा पौधे से पौधे की दूरी 18-25 से.मी. रखें। मक्का में खरपतवार नियंत्रण के लिए एट्राजिन 1 से 1.5 किलोग्राम/ हैक्टर 800 लीटर पानी में घोल कर छिडकाव करें।
  4. खरीफ की सभी फसलों में आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई करके खरपतवारों का नियंत्रण करें। इससे खरपतवारों द्वारा फसलों को कम हानि होती है तथा जल की बचत होती है और जड़ों का विकास अच्छा होता है।
  5. वातावरण में नमी बढ़ने से भंडारण गृह में कीटों द्वारा भंडारित अनाज में हानि हो सकती है। इसलिए भंडारित अनाज की जाँच करें तथा कीट नजर आए तो सेल्फाँस गोलिया @ 3 गोली प्रति टन अनाज की दर से प्रयोग करें तथा ढाँचे को अच्छी तरह से सील कर दें।
  6.         कम समय में पकने वाली अरहर की किस्मों (पूसा 991, पूसा 992, पूसा 2001, पूसा 2002) की बुवाई 10 जुलाई तक की जा सकती है। बीज किसी प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें। किसान भाईयों से यह सलाह है कि वे बीजों को बोने से पहले अरहर के लिए उपयुक्त राईजोबियम तथा फास्फोरस को घुलनशील बनाने वाले जीवाणुओं (पी एस बी) फँफूद के टीकों से अवश्य उपचार कर लें। इस उपचार से फसल के उत्पादन में वृद्धि होती है।

  7. इस मौसम में किसान अपनी मिट्टी की जांच किसी प्रमाणित स्रोत से करवाएं और जहाँ संभव हो अपने खेत को समतल करवाएं। वर्षा को ध्यान में रखते हुए किसान भाई अपने खेतों में मेड़ों को मजबुत बनाने का कार्य करें।
  8. यह समय चारे के लिए ज्वार की बुवाई के लिए उप्युक्त हैं अतः किसान भाई पूसा चरी-9, पूसा चरी-6 या अन्य सकंर किस्मों की बुवाई करें बीज की मात्रा 40 किलोग्राम/हैक्टर रखें । लोबिया की बुवाई का भी यह उप्युक्त समय है।
  9. इस मौसम में किसान ग्वार, बाजरा, लोबिया, भिंडी, सेम, पालक, चोलाई आदि फसलों की बुवाई शुरू कर सकते है। बीज किसी प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें।
  10. कद्दूवर्गीय सब्जियों की वर्षाकालीन फसल की बुवाई करें | लौकी की उन्नत किस्में पूसा नवीन,पूसा समृद्वि करेला की पूसा विशेष, पूसा दो मौसमी, सीताफल की पूसा विश्वास, पूसा विकास तुरई की पूसा स्नेहा किस्मों की बुवाई करें।
  11. किसान भाई कद्दूवर्गीय सब्जियों में फल मक्खी की निगरानी करते रहें इसके लिए मिथाइल यूजीनोल ट्रेप का प्रयोग कर सकते हैं। फल मक्खी के लक्षण पाये जाने पर रोगोर @ 2 मि.ली+10 ग्राम चीनी/गुड़ प्रति ली. पानी में मिलाकर 50 लीटर प्रति हैक्टर की दर से छिड़काव आसमान साफ होने पर करें
  12. भिंडी, मिर्च तथा बेलवाली फसल में माईट, जैसिड और होपर  की निरंतर निगरानी करते रहें। अधिक माईट पाये जाने पर फाँसमाईट @ 2 मि.ली./लीटर पानी तथा जैसिड और होपर कीट के रोकथाम के लिए रोगोर कीटनाशक 2 मि.ली./लीटर पानी  में मिलाकर छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।
  13. वर्षा को ध्यान में रखते हुऐ किसान भाईयो को सलाह है कि वे अपने खेतो के किसी एक भाग में वर्षा के पानी को इकट्ठा करने की व्यवस्था करें जिसका उपयोग वे वर्षा न आने के दौरान फसलों की उचित समय पर सिंचाई के लिए कर सकते हैं।
  14. फलों के नऐ बाग लगाने वाले गड्डों की खुदाई कर उनको खुला छोड दे ताकि हानिकारक कीटो-रोगाणु तथा खरपतवार के बीज आदि नष्ट हो जावे।
  15. 1.     देशी खाद (सड़ी-गली गोबर की खाद, कम्पोस्ट) का अधिकाधिक प्रयोग करें ताकि भूमि की जल धारण क्षमता और पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ सके। मृदा जाचँ के उपरांत उवर्रको की संतुलित मात्रा का उपयोग करें, खासतौर पर पोटाश की मात्रा बढ़ाएं ताकि फसल की सूखे से लड़ने की क्षमता बढ़ सके। वर्षा आधारित एवं बारानी क्षेत्रों में भूमि मे  नमी संचयन के लिए पलवार(मलचिंग) का प्रयोग करना लाभदायक होगा।

 सलाहकार समिति के वैज्ञानिक   

डा. अनन्ता वशिष्ठ (नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग) 
डा.देब कुमार दास (वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)
डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)
डा.जे.पी.एस. ड़बास (प्रधान वैज्ञानिक ,केटेट)
डा.बी.एस.तोमर (प्रधान वैज्ञानिक, बीज उत्पादन इकाई)
डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)
डा.पी.सिन्हा (प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)