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Agromet Advisory (Hindi)

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मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं
ग्रामीण कृषि मौसम सेवा
कृषि भौतिकी संभाग
भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली – 110012       
(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website:
www.iari.res.in

साल-22, क्रमांक :- 15/2015-16/शुक्र.                समय:  अपराह्न  2.30 बजे                दिनांक: 22-05-2015

बीते सप्ताह का मौसम (16 से 22  मई, 2015)
       सप्ताह के दौरान आसमान साफ रहा। दिन का अधिकतम तापमान 35.2 से 43.5  डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 38.4 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 20.2 से 28.2 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 24.3 डिग्री सेल्सियस) रहा। इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 57  से 71 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 21 से 40 प्रतिशत दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान दिन में औसत 8.7 घंटे  प्रति दिन (साप्ताहिक सामान्य 8.3 घंटे) धूप खिली रही। हवा की औसत गति 6.9 कि.मी. प्रति घंटा (साप्ताहिक  सामान्य 6.1 कि.मी. प्रति घंटा) तथा वाष्पीकरण की औसत दर  9.2 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 9.9 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न को हवा भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही तथा तथा अपराह्न को अधिकतर उत्तर दिशा से रही।
भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, सफदरजंग विमानपत्तन, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमी तत्व/दिनांक23-05-1524-05-1525-05-1526-05-1527-05-15
वर्षा (मि.मी.)0.01.00.00.00.0
अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}4343444444
न्यूनतम तापमान {° सेल्सियस}2828283029
बादलों की स्थिति (ओक्टा)24400
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम5055454545
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम2530252025
हवा की गति (कि.मी/घंटा)2020181919
हवा की दिशापश्चिमपश्चिमपश्चिमपश्चिमपश्चिम
विशेष मौसम23/24 मई को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कुछ जगहों पर धुलभरी प्रचण्ड़ हवा चलने की सम्भावना है।                   

साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह 27 मई, 2015 तक के लिए
कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।
1. आने वाले दिनों में लू (गर्म हवा) तथा तापमान बढने की संभावना को ध्यान में रखते हुए सब्जियों की नर्सरी तथा फलों के बगीचों में हल्की सिंचाई नियमित अंतराल पर करें। नर्सरी व वृक्षों को लू से बचाने हेतू अवरोधकों के उपयोग की सलाह दी जाती है।
2. कपास की बुवाई इस सप्ताह कर सकते है। बीज किसी प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें। तापमान को देखते हुए 10 प्रतिशत अधिक बीज का प्रयोग करें। उप्यूक्त किस्में:- एच -777, एच-974, एच-1098.
3. अरहर की बुवाई के लिए खेत की तैयारी करें। बीज किसी प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें। किसान भाईयों को यह सलाह है कि वे बीजों को बोने से पहले अरहर के लिए उपयुक्त राईजोबियम तथा फास्फोरस में घुलनशील बेक्टीरिया से अवश्य उपचार कर लें इस उपचार से बीजो के अंकुरण तथा उत्पादन में वृद्धि होती है। अरहर की उन्नत किस्में:- पूसा- 2001, पूसा-  991,पूसा- 992, पारस मानक, UPAS 120.
4. रबी फसल की कटाई के बाद खाली खेतो की गहरी जुताई कर जमीन को खुला छोड़ दें ताकि सूर्य की तेज धूप से गर्म होने के कारण इसमें छिपे कीडों के अण्डें तथा घास के बीज नष्ट हो जायेंगे।
5. इस मौसम में बेलवाली फसलों में न्यूनतम नमी बनाएं रखें अन्यथा मृदा में कम नमी होने से पुष्पन एंव परागण पर असर हो सकता है जिससे फसल उत्पादन में कमी आ सकती है।
6. मौसम शुष्क रहने की संभावना को ध्यान में रखते हुए बैंगन, मिर्च, करेला, पालक तथा टमाटर में हल्की सिंचाई करने की सलाह दी जाती है, सिंचाई सुबह या शाम के समय ही करें।
7. मिर्च के खेत में विषाणु रोग से ग्रसित पौधों को उखाड़कर जमीन में गाड़ दें। उसके उपरांत इमिडाक्लोप्रिड @ 0.3 मि.ली./लीटर की दर से छिड़काव करें। आवश्यकतानुसार फसल में कम अंतराल में सिंचाई करें।
8. भिंडी की फसल में तुड़ाई के बाद यूरिया @ 5-10 किलो प्रति एकड़ की दर से डाले तथा उसके उपरांत सिंचाई करें। साथ ही तापमान को ध्यान में रखते हुए माईट, जैसिड और होपर  की निरंतर निगरानी करते रहें। इस मौसम में भिंडी की फसल में हल्की सिंचाई कम अंतराल पर करें।
9. इस मौसम में किसान अपनी मिट्टी की जांच किसी प्रमाणित स्रोत से करवाएं और जहाँ संभव हो अपने खेत को समतल करवाएं।
सलाहकार समिति के वैज्ञानिक   
डा. अनन्ता वशिष्ठ (नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग) 
डा.देब कुमार दास (वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)
डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)
डा.जे.पी.एस. ड़बास (प्रधान वैज्ञानिक ,केटेट)
डा.बी.एस.तोमर (प्रधान वैज्ञानिक, बीज उत्पादन इकाई)
डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)
डा.पी.सिन्हा (प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)