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Agromet Advisory (Hindi)

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मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं
ग्रामीण कृषि मौसम सेवा
कृषि भौतिकी संभाग
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली – 110012       
(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website:
www.iari.res.in

साल-21, क्रमांक :- 62/2014-15/शुक्र.     समय:  अपराह्न  2.30 बजे              दिनांक: 31-10-2014
बीते सप्ताह का मौसम (25 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2014)
             सप्ताह के दौरान आसमान में आंशिक रूप से बादल छाये रहे। दिन का अधिकतम तापमान 31.4 से 32.2 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 32.3 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 14.0 से 19.9 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 16.6 डिग्री सेल्सियस) रहा। इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 86 से 98 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 32 से 49 प्रतिशत दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान दिन में औसत 1.4 घंटे  प्रति दिन (साप्ताहिक सामान्य 9.1 घंटे) धूप खिली रही। हवा की औसत गति 2.4 कि.मी. प्रति घंटा (साप्ताहिक  सामान्य  4.0 कि. मी. प्रति घंटा) तथा वाष्पीकरण की औसत दर  3.2 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 5.9 मि.मी.)  प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न को हवा शांत रही तथा अपराह्न को भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही।
भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, सफदरजंग विमानपत्तन, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमी तत्व/दिनांक01-11-1402-11-1403-11-1404-11-1405-11-14
वर्षा (मि.मी.)0.00.00.00.00.0
अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}3231313232
न्यूनतम तापमान {° सेल्सियस}1716161617
बादलों की स्थिति (ओक्टा)21111
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम9090898888
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम4035353434
हवा की गति (कि.मी/घंटा)1010091007
हवा की दिशापश्चिम-उत्तर-पश्चिमउत्तर-उत्तर-पश्चिमउत्तर-उत्तर-पश्चिमउत्तर-उत्तर-पश्चिमउत्तर-उत्तर-पश्चिम


साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह 5 नवम्बर, 2014 तक के लिए
कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।
1. किसान भाईयों को यह सलाह है कि वे मौसम को ध्यान में रखते हुए, गेंहू की बुवाई हेतू तैयार खेतों में पलेवा तथा उन्नत बीज व खाद की व्यवस्था करें। पलेवे के बाद यदि खेत में ओट आ गई हो तो उसमें गेहूँ की बुवाई कर सकते हैं। उन्नत प्रजातियाँ- सिंचित परिस्थिति- श्रेष्ठ (एच. डी. 2687), पूसा विशेष (एच. डी. 2851),  पूसा गेहूँ -109 (एच. डी. 2894), पूसा सिंधु गंगा (एच. डी. 2967), डी. बी. डब्लू .-17 । बीज की मात्रा 100 कि.ग्रा. प्रति हैक्टेयर होनी चाहिये । बुवाई से पूर्व बीजों को बाविस्टिन या थायरम @ 2-2.5 ग्राम प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित करें। जिन खेतों में यदि दीमक का प्रकोप हो तो क्लोरपाईरिफाँस (20 ईसी) @ 5 लीटर प्रति हैक्टर की दर से पलेवा के साथ दें। नत्रजन, फास्फोरस तथा पोटाश उर्वरकों की मात्रा 120, 50 व 40 कि.ग्रा. प्रति हैक्टेयर होनी चाहिये।
2. मौसम को ध्यान में रखते हुए धान की फसल यदि कटाई योग्य हो गयी तो कटाई शुरू करें। फसल कटाई के बाद फसल को 2-3 दिन खेत में सुखाकर गहाई कर लें। उसके बाद दानों को अच्छी प्रकार से धूप में सूखा लें। भण्डारण के पूर्व दानों में नमी 16 % से कम होनी चाहिए।
3. किसान चने की बुवाई इस सप्ताह कर सकते है। छोटी एवं मध्यम आकार के दाने वाली किस्मों के लिए 60–80 कि.ग्रा. तथा बड़े दाने वाली किस्मों के लिए 80–100 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर बीज की आवश्यकता होती है। बुवाई 30–35 सें. मी. दूर कतारों में करनी चाहिए। प्रमुख काबुली किस्में- पूसा 267, पूसा 1003, पूसा चमत्कार; देशी किस्में – सी. 235, पूसा 246, पी.बी.जी. 1, पूसा 372। बुवाई से पूर्व बीजों को राइजोबियम और पी.एस.बी. के टीकों (कल्चर) से अवश्य उपचार करें।
4. किसान इस मौसम में जई तथा बरसीम की बुवाई कर सकते हैं। जई की उन्नत किस्में- जे.एच.ओ.-822, ओ.एल.-9 और पूसा ओट-5 तथा बरसीम की उन्नत किस्में- वरदान, बुंदेल बरसीम-1, मसकावी, जे.बी.-3. बीज दर–जई- 80-100 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर और बरसीम- 25-30 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर।
5. इस मौसम में किसान भाई मसूर की बुवाई कर सकते है। उन्नत किस्म- पूसा मसूर–5 (एल. 4594)। बीजों को राइजोबियम और पी.एस.बी. के टीकों (कल्चर) से अवश्य उपचार करें।
6. तापमान को ध्यान में रखते हुए मटर की बुवाई में ओर अधिक देरी न करें अन्यथा फसल की उपज में कमी होगी तथा कीड़ों का प्रकोप अधिक हो सकता है। उन्नत किस्में - पूसा प्रगति, आर्किल, आजाद मटर-3, पंत मटर-3, बोनविले। बीजों को कवकनाशी केप्टान या थायरम @ 2.0 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से मिलाकर उपचार करें उसके बाद फसल विशेष राईजोबियम का टीका अवश्य लगायें। गुड़ को पानी में उबालकर ठंडा कर ले और राईजोबियम को बीज के साथ मिलाकर उपचारित करके सूखने के लिए किसी छायेदार स्थान में रख दे, तथा अगले दिन बुवाई करें।
7. वर्तमान मौसम आलू की बुवाई के लिए अनुकूल है अतः किसान आवश्यकतानुसार आलू की किस्मों की बुवाई कर सकते हैं। उन्नत किस्में - कुफरी बादशाह, कुफरी ज्योति (कम अवधि वाली किस्म), कुफरी अलंकार, कुफरी चंद्रमुखी। कतारों से कतारों तथा पौध से पौध की दूरी 45 ´ 20 या 60 ´ 15 से.मी. रखें। बुवाई से पूर्व बीजों को मेन्कोजेब @ 2.0 ग्रा. तथा कार्बंडिजम @ 1.0 ग्रा. प्रति लीटर घोल में प्रति कि.ग्रा. बीज पाँच मिनट भिगोकर रखें। उसके उपरांत बुवाई से पूर्व किसी छायादार जगह पर सूखने के लिए रखें।
8. किसान भाई इस समय लहसुन की बुवाई कर सकते हैं। उन्नत किस्में –जी-1, जी-41, जी-50, जी-282.| खेत में देसी खाद और फास्फोरस उर्वरक अवश्य डालें।
9. इस मौसम में किसान भाई गाजर की बुवाई मेड़ो पर कर सकते हैं। उन्नत किस्में - पूसा   रूधिरा और पूसा केसर। बीज दर 4.0 कि.ग्रा. प्रति एकड़। बुवाई से पूर्व बीज को केप्टान @ 2 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित करें तथा खेत में देसी खाद, पोटाश और फाँस्फोरस उर्वरक अवश्य डालें। गाजर की बुवाई मशीन द्वारा करने से बीज 1.0 कि.ग्रा. प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है, जिससे बीज की बचत तथा उत्पाद की गुणवत्ता भी अच्छी रहती है।
10. किसान भाई इस समय सरसों साग- पूसा साग-1; मूली- जापानी व्हाईट; हिल क्वीन; पूसा मृदुला (फ्रेच मूली); पालक- आल ग्रीन; पूसा भारती; शलगम- पूसा स्वेती या स्थानीय लाल किस्म; बथुआ- पूसा बथुआ-1; मेथी-पूसा कसुरी; गांठ गोभी-व्हाईट वियना,पर्पल वियना तथा धनिया- पंत हरितमा या संकर किस्मों की बुवाई मेड़ों (उथली क्यारियों) पर करें।
11. वर्तमान मौसम प्याज की बुवाई के लिए अनुकूल है। बीज दर– 10 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर। बुवाई से पहले बीजों को केप्टान@ 2.5 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचार अवश्य करें।
12. यह समय ब्रोकली, पछेती फूलगोभी, बन्दगोभी तथा टमाटर की पौधशाला तैयार करने के लिए उपयुक्त है। पौधशाला भूमि से उठी हुई क्यारियों पर ही बनायें। जिन किसान भाईयों की पौधशाला तैयार है, वह मौसस को ध्यान में रखते हुये पौध की रोपाई ऊंची मेड़ों पर करें।
13. सब्जियों  तथा फसलों की रोपाई से पहले, खेत में सड़े गोबर की खाद का उपयोग करें, क्योंकि यह मृदा के भौतिक तथा जैविक गुणों को सुधारती है तथा मृदा की जल धारण क्षमता भी बढ़ाती है।
सलाहकार समिति के वैज्ञानिक   
डा. अनन्ता वशिष्ठ (नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग) 
डा.रवीन्द्र सिंह (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)
डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)
डा.जे.पी.एस. ड़बास (प्रधान वैज्ञानिक ,केटेट)
डा.बी.एस.तोमर (प्रधान वैज्ञानिक, बीज उत्पादन इकाई)
डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)
डा.देब कुमार दास (वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)
डा.पी.सिन्हा (प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)