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Agromet Advisory (Hindi)

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मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं
ग्रामीण कृषि मौसम सेवा
कृषि भौतिकी संभाग
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली – 110012       
(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website:
www.iari.res.in

साल-21, क्रमांक :- 50/2014-15/शुक्र.     समय:  अपराह्न  2.30 बजे              दिनांक: 19-09-2014
बीते सप्ताह का मौसम (13 सितम्बर से 19 सितम्बर, 2014)
             सप्ताह के दौरान आसमान में हल्के बादल छाये रहे। दिन का अधिकतम तापमान 32.7 से 35.6 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 33.4 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 21.7 से 25.5 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 24.8 डिग्री सेल्सियस) रहा। इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 74 से 95 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 50 से 61 प्रतिशत दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान दिन में औसत 8.3 घंटे  प्रति दिन (साप्ताहिक सामान्य 7.6 घंटे) धूप खिली रही। हवा की औसत गति 5.1 कि.मी. प्रति घंटा (साप्ताहिक  सामान्य  5.0 कि. मी. प्रति घंटा) तथा वाष्पीकरण की औसत दर  6.0 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 6.4 मि.मी.)  प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न तथा अपराह्न  को हवा ज्यादातर भिन्न-भिन्न दिशाओं रही।
भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, सफदरजंग विमानपत्तन, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमी तत्व/दिनांक20-09-1421-09-1422-09-1423-09-1424-09-14
वर्षा (मि.मी.)0.00.00.00.00.0
अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}3636363737
न्यूनतम तापमान {° सेल्सियस}2524252525
बादलों की स्थिति (ओक्टा)00000
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) सुबह8075707070
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) शाम4040353540
हवा की गति (कि.मी/घंटा)1011111313
हवा की दिशापश्चिम-उत्तर- पश्चिमपश्चिम-उत्तर- पश्चिमपश्चिम-उत्तर- पश्चिमपश्चिमपश्चिम

साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह 24 सितम्बर , 2014 तक के लिए
कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।
1. सरसों की अगेती बुवाई के लिए  पूसा सरसों-25, पूसा सरसों-26, पूसा अगर्णी, पूसा तारक, पूसा महक आदि के बीज की व्यवस्था करें तथा खेतों को तैयार करें।
2. इस मौसम में किसान भाई गाजर की बुवाई मेड़ो पर कर सकते हैं। उन्नत किस्में - पूसा   रूधिरा और पूसा केसर। बीज दर 4.0 कि.ग्रा. प्रति एकड़। बुवाई से पूर्व बीज को केप्टान @ 2 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचार करें तथा खेत में देसी खाद, पोटाश और फास्फोरस उर्वरक अवश्य डालें। गाजर की बुवाई मशीन द्वारा करने से बीज 1.0 कि.ग्रा. प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है जिससे बीज की बचत तथा उत्पाद की गुणवत्ता भी अच्छी रहती है।
3. इस समय फसलों व सब्जियों में दीमक का प्रकोप होने की संभावना रहती है अतः किसान भाई फसल की निगरानी करें यदि प्रकोप दिखाई दे तो क्लोरपाइरीफाँस 20 ई सी @ 4.0 मि.ली/लीटर सिंचाई  जल के साथ देवें।
4. इस मौसम में किसान भाई अपने खेतों की नियमित निगरानी करें। यदि फसलों व सब्जियों में सफ़ेद मक्खी या चूसक कीटों का प्रकोप दिखाई दें तो इमिडाक्लोप्रिड दवाई 1.0 मि. ली./3 लीटर पानी में मिलाकर छिड़¬काव करें।
5. किसान भाई धान के ब्लास्ट (बदरा) रोग का आक्रमण होने की निगरानी हर 2 से 3 दिन के अंतराल पर करें। इस रोग का सूचक है पत्तियों में एक छोटी आँख जैसा धब्बा जिसका अंदर का भाग हल्का भूरा और बाहर गहरे भूरे रंग का होता है। आगे जाकर अनेक धब्बे मिलकर एक बड़ा धब्बा बन जाता है।
6. इस मौसम में धान में आभासी कंड (False Smut) आने की काफी संभावना है। इस बीमारी के आने से धान के दाने आकार में फूल जाते है। इसकी रोकथाम के लिए ब्लाइटोक्स 50 की 500 ग्राम प्रति एकड़ की दर से आवश्यकतानुसार पानी में मिलाकर 10 दिन के अंतराल पर 2-3 बार छिड़काव करें।
7. इस मौसम में धान की फसल को नष्ट करने वाली ब्राउन प्लांट होपर का आक्रमण आरंभ हो सकता है अतः किसान भाई खेत के अंदर जाकर पौध के निचली भाग के स्थान पर मच्छरनुमा कीट का निरीक्षण करें। यदि प्रकोप दिखाई दें तो इमिडाक्लोप्रिड दवाई 1.0 मि. ली./3 लीटर पानी में मिलाकर छिड़¬काव करें।
8. धान की फसल में तना छेदक कीट की निगरानी के लिए फीरोमोन प्रपंच 4-6 प्रति एकड़ की दर से लगाए तथा प्रकोप अधिक हो तो करटाप दवाई 4% दानें 10 किलोग्राम/एकड़ का बुरकाव करें।
9. सब्जियों (मिर्च, बैंगन) में यदि फल छेदक, शीर्ष छेदक एवं फूलगोभी व पत्तागोभी में डायमंड़ बेक मोथ की निगरानी के लिए फीरोमोन प्रपंच 4-6 प्रति एकड़ की दर से लगाए तथा प्रकोप अधिक हो तो स्पेनोसेड़ दवाई 1.0 मि.ली./4 लीटर पानी में मिलाकर छिड़¬काव करें।
10. किसान भाई इस समय सरसों साग- पूसा साग-1, मूली- पूसा चेतकी, समर लोंग, लोंग चेतकी; पालक- आल ग्रीन तथा धनिया- पंत हरितमा या संकर किस्मों की बुवाई मेड़ों (उथली क्यारियों) पर करें।
11. कद्दूवर्गीय सब्जियों में फल मक्खी की निगरानी करते रहें इसके लिए मिथाइल यूजीनोल ट्रेप का प्रयोग कर सकते हैं फल मक्खी के बचाव हेतू खेत में विभिन्न जगहो पर गुड़ या चीनी के साथ मैलाथियान (Malathion 0.1 %)  का घोल बनाकर छोटे कप या किसी और बरतन में रख दें ताकि फल मक्खी का नियंत्रण हो सके।
12. मिर्च तथा टमाटर के खेतों में विषाणु रोग से ग्रसित पौधों को उखाड़कर जमीन में गाड़ दें। यदि प्रकोप अधिक है तो इमिडाक्लोप्रिड़ @ 0.3 मि.ली. प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें ।
13. भिंड़ी, मिर्च तथा बेलवाली फसल में माईट, जैसिड़ और होपर  की निरंतर निगरानी करते रहें। अधिक माईट पाये जाने पर इथिआन @ 1.5-2 मि.ली./ लीटर पानी तथा जैसिड़ और होपर कीट के रोकथाम के लिए डाईमेथोयट कीटनाशक 2 मि.ली./ लीटर पानी  में मिलाकर छिड़काव करें।
14. किसान भाई प्रकाश प्रपंच (Light Trap) का भी इस्तेमाल कर सकते है। इसके लिए एक प्लास्टिक के टब या किसी बड़े बरतन में पानी और थोडा मिट्टी का तेल या थोडा रोगोर मिलाकर एक बल्ब जलाकर रात में खेत के बीच में रखे दें। प्रकाश से कीट आकर्षित होकर उसी घोल पर गिरकर मर जायेंगें। इस प्रपंश से अनेक प्रकार के हानिकारक कीटों का नाश होगा।
15. गेंदे की नई फसल की रोपाई के लिए यह मौसम अनुकूल है।
सलाहकार समिति के वैज्ञानिक   
डा. अनन्ता वशिष्ठ (नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग) 
डा.रवीन्द्र सिंह (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)
डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)
डा.जे.पी.एस. ड़बास (प्रधान वैज्ञानिक ,केटेट)
डा.बी.एस.तोमर (प्रधान वैज्ञानिक, बीज उत्पादन इकाई)
डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)
डा.देब कुमार दास (वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)
डा.पी.सिन्हा (प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)