Home Daily Weather Data Agromet Advisory (Hindi)

Agromet Advisory (Hindi)

E-mail Print PDF

 

मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं
ग्रामीण कृषि मौसम सेवा
कृषि भौतिकी संभाग
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली – 110012       
(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website:
www.iari.res.in

साल-21, क्रमांक :- 44/2014-15/शुक्र.     समयअपराह्न  2.30 बजे              दिनांक: 29-08-2014

बीते सप्ताह का मौसम (23 अगस्त से 29 अगस्त,, 2014)

          सप्ताह के दौरान आसमान में आंशिक रूप से बादल छाये रहे। 29 अगस्त को 9.2 मि.मी वर्षा संस्थान के वैधशाला मे दर्ज की गई। दिन का अधिकतम तापमान 36.5 से 38.5 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 33.4 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 22.6 से 27.5 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 26.0 डिग्री सेल्सियस) रहा। इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 62 से 85 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 41 से 62 प्रतिशत दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान दिन में औसत 6.0 घंटे  प्रति दिन (साप्ताहिक सामान्य 7.4 घंटे) धूप खिली रही। हवा की औसत गति 7.0 कि.मी. प्रति घंटा (साप्ताहिक  सामान्य  5.4 कि. मी. प्रति घंटा) तथा वाष्पीकरण की औसत दर  8.5 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 6.3 मि.मी.)  प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न तथा अपराह्न को हवा अधिकतर पश्चिमउत्तर-पश्चिम दिशाओं से रही। 

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, सफदरजंग विमानपत्तन, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमी तत्व/दिनांक

30-08-14

31-08-14

01-09-14

02-09-14

03-09-14

वर्षा (मि.मी.)

0.0

0.0

4.0

0.0

4.0

अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}

35

34

33

33

32

न्यूनतम तापमान {° सेल्सियस}

26

26

26

25

25

बादलों की स्थिति (ओक्टा)

6

6

6

6

6

सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) सुबह

75

70

80

85

85

सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) शाम

35

40

40

45

45

हवा की गति (कि.मी/घंटा)

07

08

10

14

10

हवा की दिशा

पूर्व

पूर्व

पूर्व

पूर्व

पूर्व

साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह 3 सितम्बर , 2014 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

1.       इस समय फसलों व सब्जियों में दीमक का प्रकोप होने की संभावना रहती है अतः किसान भाई फसल की निगरानी करें यदि प्रकोप दिखाई दे तो क्लोरपाइरीफाँस 20 ई सी @ 4.0 मि.ली/लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें

2.       इस मौसम में किसान भाई अपनी फसलों व सब्जियों में निराई-गुडाई का कार्य करें

3.       इस मौसम में किसान भाई अपने खेतों की नियमित निगरानी करें। यदि फसलों व सब्जियों में सफ़ेद मक्खी या चूसक कीटों का प्रकोप अधिक दिखाई दें तो इमिडाक्लोप्रिड दवाई 1.0 मि. ली./3 लीटर पानी में मिलाकर छिड़­काव आसमान साफ होने पर करें।

4.       इस मौसम में धान की फसल को नष्ट करने वाली ब्राउन प्लांट होपर का आक्रमण आरंभ हो सकता है अतः किसान भाई खेत के अंदर जाकर पौध के निचली भाग के स्थान पर मच्छरनुमा कीट का निरीक्षण करें। यदि प्रकोप अधिक दिखाई दें तो इमिडाक्लोप्रिड दवाई 1.0 मि. ली./3 लीटर पानी में मिलाकर छिड़­काव करें।

5.       यदि धान की फसल में पत्त्ता मरोंड या तना छेदक कीट का प्रकोप अधिक दिखाई दे तो करटाप दवाई 4% दानें 10 किलोग्राम/एकड़ का बुरकाव करें।

6.       मक्का में तना छेदक कीट की निगरानी करें यदि प्रकोप अधिक दिखाई दे तो कार्बरिल 2.0 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिकाव आसमान साफ होने पर करें।

7.       किसान भाईयों को यह सलाह है की वे गन्नें की फसल में खरपतवार नियंत्रण करें। फसल में गूल बनाए (मिट्टी चढायें) तथा गन्नें के पौधों को बांधने का कार्य करें।

8.       गन्ने की फसल मे बेधक कीटों के प्रबन्धन के लिए ट्राइको कार्ड का प्रयोग अवश्य करें। यदि प्रकोप अधिक दिखाई दे तो कार्बोफ्युरान दानें का बुरकाव 10 कि.ग्रा/एक की दर से आसमान साफ होने पर करें।

9.       सब्जियों (टमाटर, मिर्च, बैंगन फूलगोभी पत्तागोभी) में यदि फल छेदक, शीर्ष छेदक एवं फूलगोभी पत्तागोभी में डायमं बेक मोथ का प्रकोप अधिक दिखाई दे तो स्पेनोसे दवाई 1.0 मि.ली./4 लीटर पानी में मिलाकर छिड़­काव आसमान साफ होने पर करें।

10.    जिन किसान भाईयों की टमाटर, मिर्च, बैंगन फूलगोभी पत्तागोभी की पौध तैयार है, वे मौसम को ध्यान में रखते हुए रोपाई मेड़ों (उथली क्यारियों) पर करें

11.    किसान भाई फूलगोभी की पूसा शरद, पूसा हाइब्रिड-2 पंत शुभ्रा (नवम्बर-दिसम्बर) की रोपाई हेतु पौध जमीन से उठी हुई क्यारियों में तैयार करना शुरु कर सकते हैं तथा प्याज की तैयार पौध की रोपाई मेड़ों (उथली क्यारियों) पर करें।

12.    किसान भाई इस समय सरसों साग- पूसा साग-1, मूली- वर्षा की रानी, समर लोंग, लोंग चेतकी; पालक- आल ग्रीन तथा धनिया- पंत हरितमा या संकर किस्मों की बुवाई मेड़ों (उथली क्यारियों) पर करें।

13.    कद्दूवर्गीय सब्जियों मे फल मक्खी की निगरानी करते रहें इसके लिए मिथाइल यूजीनोल ट्रेप का प्रयोग कर सकते हैं फल मक्खी के बचाव हेतू खेत में विभिन्न जगहो पर गुड़ या चीनी के साथ मैलाथियान (Malathion 0.1 %)  का घोल बनाकर छोटे कप या किसी और बरतन में रख दें ताकि फल मक्खी का नियंत्रण हो सके।

14.    किसान भाई प्रकाश प्रपंश (Light Trap) का भी इस्तेमाल कर सकते है। इसके लिए एक प्लास्टिक के टब या किसी बड़े बरतन में पानी और थोडा मिट्टी का तेल या थोडा रोगोर मिलाकर एक बल्ब जलाकर रात में खेत के बीच में रखे दें। प्रकाश से कीट आकर्षित होकर उसी घोल पर गिरकर मर जायेंगें। इस प्रपंश से अनेक प्रकार के हानिकारक कीटों का नाश होगा।

 

15.  गुलदाउदी, गेंदे की तैयार पौध की मेड़ों पर रोपाई करें। ग्लेडिओलस की बीजों द्वारा बुवाई इस समय करें।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक   
डा. अनन्ता वशिष्ठ (नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग) 
डा.रवीन्द्र सिंह (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)
डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)
डा.जे.पी.एस. ड़बास (प्रधान वैज्ञानिक ,केटेट)
डा.बी.एस.तोमर (प्रधान वैज्ञानिक, बीज उत्पादन इकाई)
डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)
डा.देब कुमार दास (वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)
डा.पी.सिन्हा (प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)