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Agromet Advisory (Hindi)

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मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं
ग्रामीण कृषि मौसम सेवा
कृषि भौतिकी संभाग
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली – 110012       
(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website:
www.iari.res.in

साल-21, क्रमांक :- 7/2014-15/मंग                    समय:  अपराह्न  2.30 बजे                   दिनांक: 22-04-2014
बीते सप्ताह का मौसम ( 16 से 22 अप्रैल  2014)
                      सप्ताह के दौरान आसमान साफ रहा। 16 अप्रैल को 3.2 मि.मी तथा 18 अप्रैल को 13.2 मि.मी वर्षा संस्थान की वैधशाला मे दर्ज की गई। दिन का अधिकतम तापमान 27.9 से 36.5 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 36.1 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 16.3 से 21.4 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 19.7 डिग्री सेल्सियस) रहा। इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 64 से 87 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 31 से 63 प्रतिशत दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान दिन में औसत 7.0 घंटे  प्रति दिन (साप्ताहिक सामान्य 9.1 घंटे) धूप खिली रही। हवा की औसत गति 5.4 कि.मी. प्रति घंटा (साप्ताहिक  सामान्य  4.6 कि. मी. प्रति घंटा) तथा वाष्पीकरण की औसत दर 5.2 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 8.8 मि.मी.)  प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न तथा अपराह्न को हवा भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, सफदरजंग विमानपत्तन, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमी तत्व/दिनांक23-4-1424-4-1425-4-1426-4-1427-4-14
वर्षा (मि.मी.)0.00.00.00.00.0
अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}3738383939
न्यूनतम तापमान {° सेल्सियस}2121222222
बादलों की स्थिति (ओक्टा)22200
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) सुबह6055606055
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) शाम2015151515
हवा की गति (कि.मी/घंटा)1007030606
हवा की दिशाउत्तर-उत्तर- पश्चिमउत्तर-उत्तर- पश्चिमउत्तर-उत्तर- पश्चिमउत्तर-उत्तर-पश्चिमउत्तर-उत्तर- पश्चिम

 

साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह 27 अप्रैल, 2014 तक के लिए
कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।
1. अनाज को भंडारण में रखने से पहले भंडार घर की अच्छी तरह सफाई करें तथा अनाज को अच्छी तरह से सुखा लें एवं कूड़े-कचरे को जला या दबा कर नष्ट कर दें। भंडारघर की छ्त, दीवारों और फर्श पर एक भाग मेलाथियान 50  ई.सी.को 100 भाग पानी में मिला कर छिड़काव करें। यदि पुरानी बोरियां प्रयोग करनी पड़े तो उन्हें एक भाग मेलाथियान व 100 भाग पानी के घोल में 10 मिनट तक भिगो कर छाया में सुखा लें।
2. मूंग के उन्नत बीजों की बुवाई किसान भाई अतिशीघ्र करें । मूंग की उन्नत किस्म– पूसा विशाल, पूसा 672, पूसा 9351, पंजाब 668। बुवाई से पूर्व बीजों को फसल विशेष राईजोबीयम तथा फाँस्फोरस सोलूबलाईजिंग बेक्टीरिया से अवश्य उपचार करें।
3. मौसम शुष्क रहने की संभावना को ध्यान में रखते हुए सभी सब्जियों में हल्की सिंचाई करने की सलाह दी जाती है, सिंचाई सुबह या शाम के समय ही करें।
4. इस मौसम में बेलवाली सब्जियों में लाल भृंग कीट के आक्रमण की संभावना रहती है, यदि कीट की संख्या अधिक हो तो ड़ाईक्लोरवाँस (डी.डी.वी.पी.) 76 ई.सी.@ 1 मि.ली./लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
5. पालक की फसल की कटाई करने के बजाय उन्हें जड़ सहित उखाड़ कर बाजार भेजें।
6. भिंडी फसल में माईट कीट की निरंतर निगरानी करते रहें। अधिक कीट पाये जाने पर ईथियाँन @1.5-2 मि.ली./लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। इस मौसम में भिंडी की फसल में हल्की सिंचाई कम अंतराल पर करें।
7. इस मौसम में मूली की पूसा चेतकी अथवा समर लोंग चेतकी नामक किस्मों की बुवाई कर सकते है।
8. इस मौसम में प्याज की फसल में हल्की सिंचाई करें। सिंचाई सुबह या शाम को ही करें। वर्तमान सूखे और अधिक तापमान में नमी की कमी होने पर गांठ की गुणवत्ता तथा गांठ के आकार पर प्रभाव हो सकता है।
9. बैंगन तथा टमाटर की फसल को प्ररोह एवं फल छेदक कीट से बचाव हेतु ग्रसित फलों तथा प्रोरहों को इकट्ठा कर नष्ट कर दें। यदि कीट की संख्या अधिक हो तो स्पिनोसेड़ कीटनाशी 48 ई.सी. @ 1 मि.ली./4 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
10. ग्वार, मक्का, बाजरा, लोबिया आदि चारा फसलों की बुवाई इस सप्ताह कर सकते हैं। बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी होनी आवश्यक है। बीजों को 3-4 से.मी. गहराई पर डाले और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 25-30 से.मी. रखें।
11. नींबू प्रजाति के फलों को गिरने से रोकने के लिए 2,4-डी. का 10 पी. पी. एम. (दस मिलीग्राम प्रति लीटर पानी) घोल का छिड़काव करें। आम के फलों को गिरने से रोकने के लिए एन.ए.ए. का 15 पी.पी.एम. (15 मिलीग्राम प्रति लीटर पानी) घोल का छिड़काव करें।
12. गुलाब की क्यारियों में एक सप्ताह के अंतराल पर सिंचाई तथा निराई-गुड़ाई करें तथा सूखी टहनियों को काटे।
13. वर्तमान सूखे मौसम में गेहूँ, चना, मटर आदि कटे फसलों को आकस्मिक आग से बचाएं।
14. रबी फसल यदि कट चुकी है तो उसमें ग्रीष्मकालीन हरी खाद के लिए खेत में पलेवा करें। हरी खाद के लिए मूंग, ढ़ेचा, सनई अथवा लोबिया की बुवाई की जा सकती है परंतु बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी का होना आवश्यक है।
15. रबी फसल की कटाई के बाद खाली खेतो की गहरी जुताई कर जमीन को खुला छोड़ दें ताकि सूर्य की तेज धूप से गर्म होने के कारण इसमें छिपे कीडो के अण्ड़े तथा घास के बीज नष्ट हो जायेंगे।
सलाहकार समिति के वैज्ञानिक   
डा. अनन्ता वशिष्ठ (नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग) 
डा.रवीन्द्र सिंह (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)
डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)
डा.जे.पी.एस. ड़बास (प्रधान वैज्ञानिक ,केटेट)
डा.बी.एस.तोमर (प्रधान वैज्ञानिक, बीज उत्पादन इकाई)
डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)
डा.देब कुमार दास (वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)
डा.पी.सिन्हा (प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)