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Agromet Advisory (Hindi)

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मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं
ग्रामीण कृषि मौसम सेवा
कृषि भौतिकी संभाग
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली – 110012       
(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website:
www.iari.res.in

साल-21, क्रमांक :- 6/2014-15/गुरू                    समय:  अपराह्न  2.30 बजे                   दिनांक: 17-04-2014
बीते सप्ताह का मौसम ( 11 से 17 अप्रैल  2014)
                      सप्ताह के दौरान आसमान साफ रहा। 16 अप्रैल को 3.2 मि.मी वर्षा संस्थान की वैधशाला मे दर्ज की गई। दिन का अधिकतम तापमान 32.0 से 37.0 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 34.8 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 13.7 से 22. 0 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 18.0 डिग्री सेल्सियस) रहा। इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 61 से 92 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 31 से 54 प्रतिशत दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान दिन में औसत 7. 3 घंटे  प्रति दिन (साप्ताहिक सामान्य 8.8 घंटे) धूप खिली रही। हवा की औसत गति 5.8 कि.मी. प्रति घंटा (साप्ताहिक  सामान्य  5.1 कि. मी. प्रति घंटा) तथा वाष्पीकरण की औसत दर 6.8 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 7.9 मि.मी.)  प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न तथा अपराह्न को हवा भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, सफदरजंग विमानपत्तन, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमी तत्व/दिनांक18-04-1419-04-1420-04-1421-04-1422-04-14
वर्षा (मि.मी.)2.04.02.00.00.0
अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}3029313133
न्यूनतम तापमान {° सेल्सियस}2120191921
बादलों की स्थिति (ओक्टा)77242
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) सुबह9090857570
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) शाम3035302020
हवा की गति (कि.मी/घंटा)1007070607
हवा की दिशापूर्व-उत्तर-पूर्वपूर्व-उत्तर-पूर्वपूर्व-उत्तर - पूर्वउत्तर-उत्तर-पश्चिमउत्तर-उत्तर- पश्चिम

 

साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह 22 अप्रैल, 2014 तक के लिए
कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।
1. अनाज को भंडारण में रखने से पहले भंडार घर की अच्छी तरह सफाई करें तथा अनाज को अच्छी तरह से सुखा लें एवं कूड़े-कचरे को जला या दबा कर नष्ट कर दें। भंडारघर की छ्त, दीवारों और फर्श पर एक भाग मेलाथियान 50  ई.सी.को 100 भाग पानी में मिला कर छिड़काव करें। यदि पुरानी बोरियां प्रयोग करनी पड़े तो उन्हें एक भाग मेलाथियान व 100 भाग पानी के घोल में 10 मिनट तक भिगो कर छाया में सुखा लें।
2. इस तापमान में शंकर लोबिया (प्रजाति – पूसा कोमल, पूसा सुकोमल) की बुवाई की जा सकती है।
3. चौलाई, भिंण्डी, लौकी तथा गर्मी के मौसम वाली मूली की सीधी बुवाई हेतु वर्तमान तापमान अनुकूल है क्योंकि, बीजों के अंकुरण के लिए यह तापमान उपयुक्त हैं बुवाई के समय खेत में प्रर्याप्त नमी का ध्यान रखें । उन्नत किस्म के बीजों को किसी प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें।
4. पालक के फसल की कटाई करने के बजाय उन्हें जड़ सहित उखाड़ कर बाजार भेजें।
5. भिंडी की फसल में माईट कीट की निरंतर निगरानी करते रहें। अधिक कीट पाये जाने पर फास्माईट @ 1.5-2 मि.ली. प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।
6. रबी फसल यदि कट चुकी है तो उसमें ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल अथवा हरी खाद के लिए खेत में पलेवा करें। मूंग की पूसा रतना, सम्राट, पूसा विशाल, एस एम एल 668, आदि की प्रजातियाँ  उपयुक्त है।हरी खाद के लिए ढ़ेचा, सनई अथवा लोबिया की बुवाई की जा सकती है। परंतु बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी का होना आवश्यक है। बुवाई से पूर्व मूंग के बीजों को फसल विशेष राईजोबीयम तथा फास्फोरस सोलूबुलाईजींग बैक्टीरिया से उपचार करें।
7. पछेती बेलवाली सब्जियों में लाल भृंग कीट के आक्रमण की निरंतर निगरानी करते रहें। यदि कीट की संख्या अधिक हो तो कार्बरिल कीटनाशी @ 2 ग्राम. /  लीटर पानी की दर से छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।
8. प्याज की फसल में थ्रिप्स कीट की निगरानी करते रहें यदि कीट की संख्या अधिक हो तो इमिडाक्लोप्रिड @ 0.25-0.5 मि.ली./ लीटर पानी किसी चिपचिपा पदार्थ (स्टीकर टीपाल आदि) के साथ मिलाकर छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।
9. टमाटर के फसल में फल छेदक कीट से बचाव हेतु किसान खेत में पक्षी बसेरा लगाए। वे कीट से नष्ट फलों को इकट्ठा कर जमीन में दबा दे। साथ ही कीट की निगरानी हेतु फिरोमोन प्रपंश @ 2-3 प्रपंश प्रति एकड़ की दर से लगाएं।
10. रबी फसल की कटाई के बाद खाली खेतो की गहरी जुताई कर जमीन को खुला छोड़ दें ताकि सूर्य की तेज धूप से गर्म होने के कारण इसमें छिपे कीडो के अण्डे तथा घास के बीज नष्ट हो जायेंगे।
सलाहकार समिति के वैज्ञानिक   
डा. अनन्ता वशिष्ठ (नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग) 
डा.रवीन्द्र सिंह (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)
डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)
डा.जे.पी.एस. ड़बास (प्रधान वैज्ञानिक ,केटेट)
डा.बी.एस.तोमर (प्रधान वैज्ञानिक, बीज उत्पादन इकाई)
डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)
डा.देब कुमार दास (वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)
डा.पी.सिन्हा (प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)