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Agromet Advisory (Hindi)

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मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं
ग्रामीण कृषि मौसम सेवा
कृषि भौतिकी संभाग
भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली – 110012       
(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website:
www.iari.res.in

साल-22, क्रमांक :- 09/2015-16/शुक्र.                समय:  अपराह्न  2.30 बजे                दिनांक: 01-05-2015

बीते सप्ताह का मौसम (25 अप्रैल से 1 मई, 2015)
       सप्ताह के दौरान आसमान साफ रहा। दिन का अधिकतम तापमान 33.5 से 40.0  डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 37.3 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 20.0 से 23.8 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 21.3 डिग्री सेल्सियस) रहा। इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 59  से 71 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 25 से 51 प्रतिशत दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान दिन में औसत 7.7 घंटे  प्रति दिन (साप्ताहिक सामान्य 8.9 घंटे) धूप खिली रही। हवा की औसत गति 7.3 कि.मी. प्रति घंटा (साप्ताहिक  सामान्य 5.2 कि.मी. प्रति घंटा) तथा वाष्पीकरण की औसत दर  8.0 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 9.4 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न को हवा भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही तथा अपराह्न को अधिकतर पूर्व दिशा से रही।
भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, सफदरजंग विमानपत्तन, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमी तत्व/दिनांक02-05-1503-05-1504-05-1505-05-1506-05-15
वर्षा (मि.मी.)0.00.00.00.00.0
अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}3839394041
न्यूनतम तापमान {° सेल्सियस}2424252525
बादलों की स्थिति (ओक्टा)11000
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम6060555045
सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम3535302525
हवा की गति (कि.मी/घंटा)1106110415
हवा की दिशापूर्व-उत्तर-पूर्वपूर्वउत्तर-उत्तर-पश्चिमउत्तर-उत्तर-पश्चिमपश्चिम-उत्तर-पश्चिम
विशेष मौसमसामान्यतया शुष्क मौसम रहने का अनुमान है तथा  अधिकतम तापमान  38-40° सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 24-25° सेल्सियस तक रहने का अनुमान है।

 

साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह 6 मई, 2015 तक के लिए
कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

1. मौसम शुष्क तथा तापमान बढने की संभावना को ध्यान में रखते हुए सब्जियों तथा चारा फसलों में हल्की सिंचाई कम अंतराल पर सुबह या शाम के समय करें।
2. रबी फसल की कटाई के बाद खाली खेतो की गहरी जुताई कर जमीन को खुला छोड़ दें ताकि सूर्य की तेज धूप से गर्म होने के कारण इसमें छिपे कीडो के अण्ड़े तथा घास के बीज नष्ट हो जायेंगे।
3. इस मौसम में किसान अपनी मिट्टी की जांच किसी प्रमाणित स्रोत से करवाएं और जहाँ संभव हो अपने खेत का समतलनीकरण करवाएं।
4. ग्रीष्मकाल हरी खाद के लिए सनई, ढैंचा, ग्वार, लोबिया, मूंग आदि की बुवाई कर सकते हैं। सनई की बीज दर 60-70 और ढैंचा की 50-60 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर है। अच्छे अंकुरण के लिए खेत में पर्याप्त नमी होनी आवश्यक है।
5. ग्वार, मक्का, बाजरा, लोबिया आदि चारा फसलों की बुवाई इस सप्ताह कर सकते हैं। बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी होनी आवश्यक है। बीजों को 3-4 से.मी. गहराई पर डाले और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 25-30 से.मी. रखें।
6. तापमान अधिक रहने की संभावना को देखते हुए किसान भाई तैयार सब्जियों की तुड़ाई सुबह या शाम को करें तथा इसके बाद इसे छायादार स्थान में रखें।
7. इस मौसम में बेलवाली फसलों में न्युनतम नमी बनाएं रखें अन्यथा मृदा में कम नमी होने से परागण पर असर हो सकता है जिससे फसल उत्पादन में कमी आ सकती है।
8. भिंडी की फसल में तुड़ाई के बाद युरिया @ 5-10 कि.ग्रा. प्रति एकड़ की दर से डाले तथा माईट कीट की निरंतर निगरानी करते रहें। अधिक कीट पाये जाने पर ईथियाँन@1.5-2 मि.ली./लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। इस मौसम में भिंडी की फसल में हल्की सिंचाई कम अंतराल पर करें।
9. बैंगन तथा टमाटर की फसल को प्ररोह एवं फल छेदक कीट से बचाव हेतु ग्रसित फलों तथा प्रोरहों को इकट्ठा कर नष्ट कर दें। साथ ही कीट की निगरानी हेतु फिरोमोन प्रपंश @ 2-3 प्रपंश प्रति एकड़ की दर से लगाएं। यदि कीट की संख्या अधिक हो तो स्पिनोसेड़ कीटनाशी 48 ई.सी. @ 1 मि.ली./4 लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
10. इस मौसम में प्याज तथा लहसुन की तैयार फसल  की खुदाई से एक सप्ताह पहले हल्की सिंचाई करें और उसके उपरांत खुदाई करें।
11. भंडारण से पूर्व अनाज को अच्छी प्रकार से साफ करें और यह सुनिश्चित करें की दानों में 12% से कम नमी हों । जिस भंडार में अनाज रखना हों उसे अच्छी प्रकार साफ करें। दीवारों के दरारों को बन्द करें तथा पूताई करें। जिन बोरों में अनाज रखना हो उन्हें धूप में सुखाएं, जिससे कीडों के अंडो तथा रोग के अंश नष्ट हों। भंडारण से पूर्व यह ध्यान रखें की दानों को सुबह ही बोरों में डालें अन्यथा गर्म दानों को रखने से रोग तथा कीडों के पनपने की संभावना बढ़ सकती है। किसान अनाज का भंडारण पूसा कोठार में कर सकते हैं। पूसा कोठार में भंडारण से यह लाभ है कि अनाज की जमाव शक्ति बरकरार रहती है। अनाज भंडारग्रह में सुबह के समय ही भरें।
सलाहकार समिति के वैज्ञानिक   
डा. अनन्ता वशिष्ठ (नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग) 
डा.देब कुमार दास (वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)
डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)
डा.जे.पी.एस. ड़बास (प्रधान वैज्ञानिक ,केटेट)
डा.बी.एस.तोमर (प्रधान वैज्ञानिक, बीज उत्पादन इकाई)
डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)
डा.पी.सिन्हा (प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)