मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

कृषि भौतिकी संभाग

     भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in

साल-25, क्रमांक:- 66/2018-19/शुक्र.           समय: अपराह्न  2.30 बजे          दिनांक:16-11-2018

बीते सप्ताह का मौसम (10 से 16 नवम्बर, 2018)

        सप्ताह के दौरान आसमान साफ रहा। दिन का अधिकतम तापमान 26.0 से 30.0 डिग्री सेल्सियस(साप्ताहिक सामान्य 29.3 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 9.2 से 17.2 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 13.8 डिग्री सेल्सियस)रहा।इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 83 से 98 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 46 से 67 प्रतिशत दर्ज की गई।सप्ताह के दौरान दिन में औसत 3.3 घंटे प्रतिदिन(साप्ताहिक सामान्य 8.8 घंटे)धूप खिली रही।हवा की औसत गति 1.9 कि.मी. प्रतिघंटा(साप्ताहिक  सामान्य 4.1 कि.मी. प्रतिघंटा)तथा वाष्पीकरण की औसत दर 3.2 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 5.5 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न को हवा ज़्यादातर शांत रही तथा अपराह्न को भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमीतत्व/दिनांक

17-11-18

18-11-18

19-11-18

20-11-18

21-11-18

वर्षा (मि.मी.)

0.0

0.0

0.0

0.0

0.0

अधिकतमतापमान {°सेल्सियस}

28

29

29

30

29

न्यूनतमतापमान {° सेल्सियस}

13

12

    13

13

14

बादलोंकीस्थिति (ओक्टा)

1

1

1

1

4

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

90

90

90

90

90

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

45

45

50

50

50

हवाकीगति (कि.मी/घंटा)

20

    10

    15

15

15

हवाकीदिशा

पश्चिम

उत्तर-उत्तर-पश्चिम

   पूर्व

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम

साप्ताहिक संचयी वर्षा (मि.मी.)

                   0.0























साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह
21 नवम्बर, 2018 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

1.   किसानों को सलाह है कि खरीफ फ़सलों के बचे हुए अवशेषों को ना जलाऐ| क्योकि इससे वातावरण में प्रदूषण ज़्यादा होता है, जिससे स्वास्थय सम्बन्धी बीमारियों की संभावना बढ जाती हैं । इससे उत्पन्न धुंध के कारण सूर्य की किरणे फसलों तक कम पहुचती है, जिससे फसलों में वाष्पोत्सर्जन व भोजन बनाने में कमी आती है इस कारण फसलों की उत्पादकता व गुणवत्ता प्रभावित होती है |

2.     किसानों को यह सलाह है कि वे मौसम को देखते हुए, गेंहू की बुवाईहेतू तैयार खेतों में ओट आ गई हो तो उसमें गेहूँ की बुवाई कर सकते हैं। उन्नत प्रजातियाँ- सिंचित परिस्थिति- श्रेष्ठ (एच. डी. 2687), पूसा विशेष (एच. डी. 2851),  पूसा गेहूँ -109 (एच. डी. 2894), पूसा सिंधु गंगा(एच. डी. 2967), डी. बी. डब्लू.-17| बीज की मात्रा 100 कि.ग्रा. प्रति हैक्टेयर होनी चाहिये । बुवाई से पूर्व बीजों को बाविस्टिन या थायरम @ 2.5 ग्राम प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित करें। जिन खेतों में यदि दीमक का प्रकोप हो तो क्लोरपाईरिफाँस (20 ईसी) @ 5 लीटर प्रति हैक्टर की दर से पलेवा के साथ दें। नत्रजन, फास्फोरस पोटाश तथा जिंक सल्फेट उर्वरकों की मात्रा120, 50, 40 व 20 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर होनी चाहिये।

3. किसान इस मौसम में जई तथा बरसीम की बुवाई कर सकते हैं। जई की उन्नत किस्में- जे.एच.ओ.-822, ओ.एल.-9 और पूसा ओट-5 तथा बरसीम की उन्नत किस्में- वरदान, बुंदेल बरसीम-1, मसकावी, जे.बी.-3. बीज दरजई-80-100 कि.ग्रा.प्रति हैक्टर और बरसीम-25-30 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर।

4.     तापमान को ध्यान में रखते हुए मटर की बुवाई करें। उन्नत किस्में – ए. पी.-3, बोनविले, लिंकन।बीजों को कवकनाशी केप्टान या थायरम @ 2 ग्रा. प्रतिकि.ग्रा.बीज की दर से उपचार करें उसके बाद फसल विशेष राईजोबियम का टीका अवश्य लगायें। गुड़ को पानी में उबालकर ठंडा कर ले और राईजोबियम को बीज के साथ मिलाकर उपचारित करके सूखने के लिए किसी छायेदार स्थान में रख दें तथा अगले दिन बुवाई करें।

5.    आलू के पौधों की ऊँचाई यदि 15-22 से.मी हो जाए तब उनमें मिट्टी चढ़ाने का कार्य जरूरी है अथवा बुवाई के 30-35 दिन बाद मिट्टी चढ़ाई का कार्य सम्पन्न करें।

6.     किसान गाजर की यूरोपियन किस्मों जैसे नेंटीस, पूसा यमदागिनी, मूली की यूरोपियन किस्मों जैसे हिल क्वीन, जापानीज व्हाईट, पूसा हिमानी, चुंकदर की किस्म क्रिमसन ग्लोब तथा शलगम की पी. टी. डब्लू. जी. आदि की बुवाई इस समय कर सकते है।

7.    किसान इस समय पत्तेदार सब्जियों में सरसों साग- पूसा साग-1; पालक-आल ग्रीन,पूसा भारती; बथुआ- पूसा बथुआ-1; मेथी-पूसा कसुरी; तथा धनिया-पंत हरितमा या संकर किस्मोंकी बुवाई करें।

8.    वर्तमान मौसम प्याज की बुवाई के लिए अनुकूल है। बीज दर– 10 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर। बुवाई से पहले बीजों को केप्टान@ 2.5 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचार अवश्य करें।

9.   वर्तमान तापमान स्नोबोल किस्म की फूलगोभी, सलाद, बन्दगोभी और ब्रोकली की पौधशाला बनाने  तथा तैयार पौध की रोपाई के लिए अनुकूल है। ब्रोकली की उन्नत किस्में पालम समृद्धि, पालम कचंन (सामान्य किस्में), ऐश्वर्या, पेकमेन (संकर किस्में)। 

10.इस सप्ताह किसान सब्जियों की निराई गुडाई करके खरपतवारो को  निकाले। 15 से 25 दिन की सब्जियों में नत्रजन की बची हुई मात्रा का छिड़काव करें

11.   समय पर बोई गई सरसों की फ़सल में विरलीकरण तथा खरपतवार नियंत्रण का कार्य करें।

12.   धान के भण्डारण के पूर्व दानों में नमी 12 % से कम होनी चाहिए। अनाज को भंडार में रखने से पहले यहसुनिश्चित कर ले कि भंडारण कीट रहित हों। इसके लिये भंडारों को साफ सुथरा तथा लिपाई कर के अच्छी तरह सुखा दे उसके बाद ही अनाज को भंडारों में रखें।

13.   पछेती गैदें की तैयार पौध की रोपाई करें।

 

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक 

   डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

     डा.देब कुमार दास(प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)   

डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)

डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग) 

डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग