मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

कृषि भौतिकी संभाग

          भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in

साल-25, क्रमांक:- 13/2018-19/मंग.   समय:     अपराह्न  2.30 बजे         दिनांक:15-05-2018

बीते सप्ताह का मौसम (09 से 15 मई 2018)

     सप्ताह के दौरान आसमान में हल्के बादल रहें। दिन का अधिकतम तापमान 34.5 से 41.8 डिग्री सेल्सियस(साप्ताहिक सामान्य 38.0 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 18.0 से 28.4 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 23.0 डिग्री सेल्सियस)रहा।इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 54 से 66 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 20 से 46 प्रतिशत दर्ज की गई।सप्ताह के दौरान दिन में औसत 7.0 घंटे प्रतिदिन(साप्ताहिक सामान्य 8.9 घंटे)धूप खिली रही।हवा की औसत गति 5.2 कि.मी. प्रतिघंटा(साप्ताहिक  सामान्य 6.8 कि.मी. प्रतिघंटा)तथा वाष्पीकरण की औसत दर 6.5 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 10.1 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न को हवा अधिकतर शांत रही तथा अपराह्न को भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमीतत्व/दिनांक

16-05-18

17-05-18

18-05-18

19-05-18

20-05-18

वर्षा (मि.मी.)

0.0

0.0

0.0

0.0

   0.0

अधिकतमतापमान {°सेल्सियस}

40

41

42

43

   42

न्यूनतमतापमान {° सेल्सियस}

25

25

26

    26

26

बादलोंकीस्थिति (ओक्टा)

     3

 1

 1

 3

 2

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

70

65

65

65

65

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

35

35

35

35

35

हवाकीगति (कि.मी/घंटा)

  10

05

 25

    25

10

हवाकीदिशा

  पश्चिम- उत्तर-पश्चिम

उत्तर-उत्तर-पश्चिम

 पश्चिम

  पश्चिम

पश्चिम- उत्तर-पश्चिम

विशेषमौसम

दिल्ली एनसीआर में  1819 मई 2018 को दिन के समय तीव्र मैदानी हवायें चलेगीं ।

 
























साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह
20 मई, 2018 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

  1. मौसम शुष्क रहने की संभावना को ध्यान में रखते हुए सभी सब्जियों तथा खड़ी फसलों में हल्की सिंचाई करने की सलाह दी जाती है, सिंचाई सुबह या शाम के समय ही करें।
  2. रबी फसल की कटाई के बाद खाली खेतो की गहरी जुताई कर जमीन को खुला छोड़ दें ताकि सूर्य की तेज धूप से गर्म होने के कारण इसमें छिपे कीडो के अण्ड़े तथा घास के बीज नष्ट हो जायेंगे।
  3. इस मौसम में किसान अपनी मिट्टी की जांच किसी प्रमाणित स्रोत से करवाएं और जहाँ संभव हो अपने खेत का समतलनीकरण करवाएं।
  4. ग्रीष्मकाल हरी खाद के लिए सनई, ढैंचा, ग्वार, लोबिया, मूंग आदि की बुवाई कर सकते हैं। सनई की बीज दर 60-70 और ढैंचा की 50-60 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर। अच्छे अंकुरण के लिए खेत में पर्याप्त नमी होनी आवश्यक है।
  5. ग्वार, मक्का, बाजरा, लोबिया आदि चारा फसलों की बुवाई इस सप्ताह कर सकते हैं। बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी होनी आवश्यक है। बीजों को 3-4 से.मी. गहराई पर डाले और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 25-30 से.मी. रखें।
  6. कपास की बुवाई इस सप्ताह कर सकते है। बुवाई से पहले खेतों में प्रयाप्त नमी होना आवश्यक है बीज किसी प्रमाणितस्रोत से ही खरीदें। उप्यूक्त किस्में:- एच -777, एच-974, एच-1098.
  7. अरहर की बुवाई के लिए खेत की तैयारी करें। बीज किसी प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें। किसानों को सलाह है कि वे बीजों को बोने से पहले अरहर के लिए उपयुक्त राईजोबियम तथा फास्फोरस में घुलनशील बेक्टीरिया से अवश्य उपचार कर लें | इस उपचार से बीजो के अंकुरण तथा उत्पादन में वृद्धि होती है। अरहर की उन्नत किस्में:- पूसा- 2001, पूसा-  991,पूसा- 992, पारस मानक, UPAS 120.
  8. तापमान अधिक रहने की संभावना को देखते हुए, किसान भाई तैयार सब्जियों की तुड़ाई सुबह या शाम को करें तथा इसके बाद इसे छायादार स्थान में रखें।
  9. मिर्च के खेत में माईट कीट की निरंतर निगरानी करते रहें। आवश्यकतानुसार फसल में कम अंतराल में सिंचाई करें।
  10. इस मौसम में बेलवाली फसलों में न्युनतम नमी बनाएं रखें अन्यथा मृदा में कम नमी होने से परागण पर असर हो सकता है जिससे फसल उत्पादन में कमी आ सकती है।
  11. भिंडी की फसल में तुड़ाई के बाद युरिया @ 5-10 कि.ग्रा. प्रति एकड़ की दर से डाले तथा माईट कीट की निरंतर निगरानी करते रहें। अधिक कीट पाये जाने पर ईथियाँन@1.5-2 मि.ली./लीटर पानी की दर से छिड़काव आसमान साफ होने पर करें। इस मौसम में भिंडी की फसल में हल्की सिंचाई कम अंतराल पर करें।
  12. बैंगन तथा टमाटर की फसल को प्ररोह एवं फल छेदक कीट से बचाव हेतु ग्रसित फलों तथा प्रोरहों को इकट्ठा कर नष्ट कर दें। यदि कीट की संख्या अधिक हो तो स्पिनोसेड़ कीटनाशी 48 ई.सी. @ 1 मि.ली./4 लीटर पानी की दर से छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।
  13. नींबू, आम, किन्नों प्रजाति  तथा केले में वृक्षों की सिंचाई करते रहें तथा वृक्षों का लू से बचाव हेतू अवरोधकों का उपयोग करें।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक    

   डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

     डा.देब कुमार दास(प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)

डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)

डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग