मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

कृषि भौतिकी संभाग

     भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in

साल-25, क्रमांक:- 32/2018-19/शुक्र.   समय: अपराह्न  2.30 बजे       दिनांक:20-07-2018

बीते सप्ताह का मौसम (14 से 20 जुलाई, 2018)

        सप्ताह के दौरान आसमान में हल्के बादल रहे। 14 जुलाई को 122.4 मि.मी तथा 17 जुलाई को 28.6 मि.मी वर्षा संस्थान की वैधशाला मे दर्ज की गई।दिन का अधिकतम तापमान 31.5 से 37.4 डिग्री सेल्सियस(साप्ताहिक सामान्य 34.1 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 23.0 से 27.0 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 26.8 डिग्री सेल्सियस)रहा।इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 70 से 92 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 54 से 91 प्रतिशत दर्ज की गई।सप्ताह के दौरान दिन में औसत 4.5 घंटे प्रतिदिन(साप्ताहिक सामान्य 6.1 घंटे)धूप खिली रही।हवा की औसत गति 4.5 कि.मी. प्रतिघंटा(साप्ताहिक  सामान्य 6.8 कि.मी. प्रतिघंटा)तथा वाष्पीकरण की औसत दर 4.6 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 6.6 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न तथा अपराह्न को हवा भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमीतत्व/दिनांक

21-07-18

22-07-18

23-07-18

24-07-18

25-07-18

वर्षा (मि.मी.)

20.0

70.0

20.0

10.0

   2.0

अधिकतमतापमान {°सेल्सियस}

34

32

33

35

   35

न्यूनतमतापमान {° सेल्सियस}

28

27

26

    26

26

बादलोंकीस्थिति (ओक्टा)

    6

 7

 6

 6

 6

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

90

95

90

90

85

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

52

50

55

55

57

हवाकीगति (कि.मी/घंटा)

  10

10

    15

    20

20

हवाकीदिशा

दक्षिण-दक्षिण-पूर्व

दक्षिण  

पूर्व-उत्तर-पूर्व

पूर्व

पूर्व

विशेषमौसम

दिल्ली एनसीआर में  22 जुलाई 2018 को भारी बारिश होने की सम्भावना है। 





























साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह
25 जुलाई, 2018 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

1.   वर्षा को ध्यान में रखते हुये किसान धान के खेतों की मेंड़ो को मजबुत बनाऐं जिससे ज्यादा से ज्यादा पानी खेत में रूक सके।

2.   जिन किसानों की धान की नर्सरी तैयार हैं तो धान की रोपाई प्राथमिकता के आधार पर करें। फसल में कम से कम 2.5 से.मी. पानी खड़ा रखें। पौध से पौध की दूरी 10 सेमी तथा पंक्ति से पंक्ति की दूरी 20 सेमी रखें | जिन किसान भाईयों की पौधशाला खराब हो गयी हो तो वे धान  के अंकुरित बीजों की बुवाई सीधे कर सकते है, इसके लिए खेत समतल होना चाहिये, साथ ही धान की कम समय में तैयार होने वाली किस्में जैसे पूसा सुगन्ध-5, साकेत-4, गोविन्द, पी एस-5, पी आर एच-10 या क्षेत्र विशेष के लिए प्रमाणित किस्मों का बीज लेकर सीधे अंकुरित बीजों की बुवाई कर सकते है। उर्वरकों में 120 किलोग्राम नत्रजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस, 40 किलोग्राम पोटाश और 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट/ हैक्टर की दर से ड़ालें, तथा नील हरित शैवाल का एक पेकेट/एकड़ का प्रयोग करे ताकि मृदा में नत्रजन की मात्रा बढाई जा सकें। नत्रजन की आधी मात्रा (60 किलोग्राम) ही रोपाई के समय प्रयोग करें।

3.   वर्षा के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हूये किसानों को सलाह है कि इस सप्ताह मक्का की बुवाई करें। संकर किस्में - ए एच-421 व ए एच-58 तथा उन्नत किस्में पूसा कम्पोजिट-3, पूसा कम्पोजिट-4,बीज की मात्रा 20-30 किलोग्राम/हैक्टर रखें। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 60-75 से.मी. तथा पौधे से पौधे की दूरी 18-25 से.मी. रखें। मक्का, ज्वार एंव बाजरे में खरपतवार नियंत्रण के लिए एट्राजिन 1 से 1.5 किलोग्राम / हैक्टर 800 लीटर पानी में घोल कर मौसम साफ होने पर छिडकाव करें।

4.   किसानों को सलाह है कि बाजरे (किस्में-संकर बाजरा पूसा-605, संकर बाजरा पूसा-415, संकुल बाजरा पूसा-383, एच.एस.वी-67) की बुवाई शीघ्र शुरू करें। बीज को उपचारित करना आवश्यक है विशेष रूप से अरगट रोग के रोकथाम के लिए 10 % नमक के घोल में बीजों को भिगो दें तथा ऊपर आये हुए खराब व हल्के बीजों को निकालकर फेंक दें इसके उपरांत बीजों को थीरम या बावस्टिन दवाई 2.0 ग्राम/किलोग्राम की दर से उपचारित करे ताकि बीज जनित रोग खत्म हो जाय़ॆ।

5.   यह समय चारे के लिए ज्वार की बुवाई के लिए उप्युक्त हैं अतः किसान पूसा चरी-9, पूसा चरी-6, की बुवाई करें। बीज की मात्रा 20-30 किलोग्राम/हैक्टर रखें । लोबिया की  बुवाई का भी यह उप्युक्त समय है।

6.   जिन किसानों की मिर्च, बैंगन वअगेती फूलगोभी की पौध तैयार है, वे मौसम को मध्यनजर रखते हुए रोपाई मेंड़ों(उथली क्यारियों) पर करें। किसान ध्यान रखें कि खेत में ज्यादा पानी खड़ा न रहें यदि खेत में पानी ज्यादा रह गया तो उसकी निकासी का तुरंत प्रबन्ध करें।

7.   कद्दूवर्गीय सब्जियोंकी वर्षाकालीन फसल की बुवाई करें। उन्नत किस्में: लोकी- पूसा संतुष्टि, पूसा नवीन, पूसा सदेंश, करेला- पूसा विशेष, पूसा-दो मोसमी, सीताफल- पूसा विश्वास, पूसा विकास; तुरई- पूसा चिकनी, पूसा स्नेह; धारीदार तुरई- पूसा नसदार किस्मों की बुवाई मेंडों (उथली क्यारियों) पर करें।

8.   कद्दूवर्गीय सब्जियों की वर्षाकालीन फसलों में हानिकारक कीटों-बीमारियों की निगरानी करें व बेलों को ऊपर चढ़ाने की व्यवस्था करे। ताकि वर्षा से सब्जियों की लताओं को गलने से बचाया जा सके तथा जल निकास का उचित प्रबन्ध रखें। 

9.   कद्दूवर्गीय एवं अन्य सब्जियों में मघुमक्खियों का बडा योगदान है क्योंकि, वे परांगण में सहायता करती है इसलिए जितना संभव हो मघुमक्खियों के पालन को बढ़ावा दें। कीड़ों एवं बीमारियों की निरंतर निगरानी करते रहे, कृषि विज्ञान केन्द्र से सम्पर्क रखें व सही जानकारी लेने के बाद ही दवाईयों का प्रयोग करें। फल मक्खी से प्रभावित फलों को तोडकर गहरे गड्डे में दबा देवें, फल मक्खी के बचाव हेतू खेत में विभिन्न जगहो पर गुड़ या चीनी के साथ मैलाथियान (Malathion10%) का घोल बनाकर छोटे कप या किसी और बरतन में रख दें ताकि फल मक्खी का नियंत्रण हो सके।

10.इस मौसममें किसान ग्वार, लोबिया, भिंड़ी, सेम, पालक, चोलाई आदि फसलों की बुवाई करें। बीज किसी प्रमाणित स्रोत से खरीदें एवं बीजों को उपचारित करके ही बोये।

11.किसान इस समय मूली-वर्षा की रानी, समर लोंग, लोंग चेतकी, पूसा चेतकी; पालक-आल ग्रीन तथा धनिया-पंत हरितमा या संकर किस्मोंकी बुवाई मेंड़ों(उथली क्यारियों) पर करें तथा जल निकास का उचित प्रबन्ध करें।

12.भिंड़ी, मिर्च तथा बेलवाली फसल में माईट, जैसिड़ और होपर  की निरंतर निगरानी करते रहें। अधिक माईट पाये जाने पर फाँसमाईट @ 1.5-2 मि.ली./ लीटर पानी तथा जैसिड़ और होपर कीट के रोकथाम के लिए रोगोर कीटनाशक 2 मि.ली./ लीटर पानी  में मिलाकर छिड़काव मौसम साफ होने पर करें।

13.बेबी कार्न की किस्म एच एम-4 तथा स्वीट कार्न की बुवाई के लिए यह समय उत्तम हैं।

14.फलों के नऐ बाग लगाने वाले गड्डों में अच्छी गुणवत्ता के पौधों को लगाये|

15.अगले पाँच दिनों में भारी बारिश होने  की सम्भावना को देखेते हुये सभी सब्जियों, दलहनी, मक्का तथा पौधशाला में जल निकास का उचित प्रबंन्ध करें। साथ ही सभी फसलोंमें सिचाई तथा किसी भी प्रकार का छिडकाव ना करें।

16.वर्षा को ध्यान में रखते हुऐ किसानों को सलाह है कि वे अपने खेतो के किसी एक भाग में वर्षा के पानी को इकट्ठा करने की व्यवस्था करें जिसका उपयोग वे वर्षा न आने के दौरान फसलों की उचित समय पर सिंचाई के लिए कर सकते है

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक    

   डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

     डा.देब कुमार दास(प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)

डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)

डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग