मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

कृषि भौतिकी संभाग

      भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in

साल-25, क्रमांक:- 51/2018-19/मंग.                समय: अपराह्न  2.30 बजे         दिनांक:25-09-2018

बीते सप्ताह का मौसम (19 से 25 सितम्बर, 2018)

        सप्ताह के दौरान आसमान में हल्के बादल छाये रहें। बीते सप्ताह के दौरान 68.6 मि.मी वर्षा संस्थान के वैधशाला मे दर्ज की गई। दिन का अधिकतम तापमान 26.0 से 34.5 डिग्री सेल्सियस(साप्ताहिक सामान्य 34.4 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 20.2 से 23.0 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 24.5 डिग्री सेल्सियस)रहा।इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 83 से 96 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 51 से 87 प्रतिशत दर्ज की गई।सप्ताह के दौरान दिन में औसत 4.8 घंटे प्रतिदिन(साप्ताहिक सामान्य 9.0 घंटे)धूप खिली रही।हवा की औसत गति 6.1 कि.मी. प्रतिघंटा(साप्ताहिक  सामान्य 5.3 कि.मी. प्रतिघंटा)तथा वाष्पीकरण की औसत दर 4.0 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 6.8 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न तथा अपराह्न को हवा भिन्न-भिन्न दिशाओ से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमीतत्व/दिनांक

26-09-18

27-09-18

28-09-18

29-09-18

30-09-18

वर्षा (मि.मी.)

0.0

0.0

0.0

0.0

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अधिकतमतापमान {°सेल्सियस}

31

32

32

33

33

न्यूनतमतापमान {° सेल्सियस}

 23

23

23

23

23

बादलोंकीस्थिति (ओक्टा)

4

1

1

1

1

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

80

75

75

70

70

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

65

60

60

55

50

हवाकीगति (कि.मी/घंटा)

10

     10

10

10

10

हवाकीदिशा

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम

पूर्व-उत्तर-पूर्व

पूर्व-उत्तर-पूर्व

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम

उत्तर

साप्ताहिक संचयी वर्षा (मि.मी.)

                   0.0


























साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह
30 सितम्बर 2018 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

1.   अगेती रबी फसलों की तैयारी के लिए खेत की जुताई करने के तुरंत बाद पाटा अवश्य लगाएं ताकि मिट्टी से नमी का ह्रास न हो।

2.  रबी की फसलों की बुवाई से पहले किसान अपने-अपने खेतों को अच्छी प्रकार से साफ-सुथरा करें। मेड़ों, नालों, खेत के रास्तों तथा खाली खेतों को साफ-सुथरा करें ताकि कीटों के अंडे, रोगों के कारक नष्ट हो  सके  तथा खेत में सड़े गोबर की खाद का उपयोग करें क्योंकि यह मृदा के भौतिक तथा जैविक गुणों को सुधारती है तथा मृदा की जल धारण क्षमता भी बढ़ाती है।

3.  मौसम की अनुकूलता को ध्यान में रखते हुए किसान सरसों की बुवाई कर सकते हैं। उन्नत किस्में- पूसा तारक, पूसा महकबीज दर–1.5-2.0 कि.ग्रा. प्रति एकड। बुवाई से पहले खेत में नमी के स्तर को अवश्य ज्ञात कर ले ताकि अंकुरण प्रभावित न हो। बुवाई से पहले बीजों को थायरम या केप्टान @ 2.5 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचार करें। बुवाई कतारों में करना अधिक लाभकारी रहता है। कम फैलने वाली किस्मों की बुवाई 30 सें. मी. और अधिक फैलने वाली किस्मों की बुवाई 45-50 सें.मी. दूरी पर बनी पंक्तियों में करें। विरलीकरण द्वारा पौधे से पौधे की दूरी 12-15 सें.मी. कर ले। मिट्टी जांच के बाद यदि गंधक की कमी हो तो 20 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर की दर से अंतिम जुताई पर डालें।

4.  इस मौसम में किसान गाजर की बुवाई मेड़ो पर कर सकते हैं। उन्नत किस्में - पूसा रूधिरा, पूसा असिता। बीज दर 4.0 कि.ग्रा. प्रति एकड़। बुवाई से पूर्व बीज को केप्टान @ 2 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचार करें तथा खेत में गोबर की खाद, पोटाश और फास्फोरस उर्वरक अवश्य डालें। गाजर की बुवाई मशीन द्वारा करने से बीज 2.0 कि.ग्रा. प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है जिससे बीज की बचत तथा उत्पाद की गुणवत्ता भी अच्छी रहती है।

5.  इस मौसममें किसान अपने खेतों की नियमित निगरानी करें। यदि फसलों व सब्जियों में सफ़ेद मक्खी या चूसक कीटों का प्रकोप दिखाई दें तो थायमीथोजाम@ 2.0 ग्रा. प्रति 10 लीटर पानी में या नीम-तेल (5 %) प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़­काव करें।

6.  इस मौसम में धान में आभासी कंड (False Smut) आने की काफी संभावना है। इस बीमारी के आने से धान के दाने आकार में फूल जाते है। इसकी रोकथाम के लिए ब्लाइटोक्स 50 की 500 ग्राम प्रति एकड़ की दर से आवश्यकतानुसार पानी में मिलाकर 10 दिन के अंतराल पर 2-3 बार छिड़काव करें।

7.  इस मौसम में धान की फसल को नष्ट करने वाली ब्राउन प्लांट होपरका आक्रमण आरंभ हो सकता है अतः किसान खेत के अंदर जाकर पौध के निचली भाग के स्थान पर मच्छरनुमा कीट का निरीक्षण करें।

8.  सब्जियों (मिर्च, बैंगन) में यदि फल छेदक, शीर्ष छेदक एवं फूलगोभी पत्तागोभी में डायमं बेक मोथ की निगरानी के लिए फीरोमोन प्रपंच 4-6 प्रति एकड़ की दर से लगाए तथा प्रकोप अधिक हो तो स्पेनोसे दवाई 1.0 मि.ली./4 लीटर पानी में मिलाकर छिड़­काव करें।

9.  किसान इस समय सरसों साग- पूसा साग-1, मूली-पूसा चेतकी, समर लोंग, लोंग चेतकी; पालक- आल ग्रीन मेथी- पी. ई. बी. तथा धनिया-पंत हरितमा या संकर किस्मों की बुवाई मेड़ों (उथली क्यारियों) पर करें।

10.जिन किसानों की हरी प्याज की पौध तैयार हैं तो रोपाई मेड़ों(उथली क्यारियों) पर करें। जिनको पौधशाला तैयार करनी है तो पौधशाला जमीन से थोड़ा ऊपर बनाये।

11.  अगेती आलू की बुवाई से किसानों को अधिक लाभ की प्राप्ति हो सकती है,क्योंकि यह फसल 60-90 दिन में तैयार हो जाती है।उन्नत किस्म- कुफरी सुर्या, इसके बाद रबी की कोई अन्य फसल जैसे पछेता गेहूँ को लिया जा सकता है।

12.किसान प्रकाश प्रपंच (Light Trap) का भी इस्तेमाल कर सकते है। इसके लिए एक प्लास्टिक के टब या किसी बड़े बरतन में पानी और थोडा मिट्टी का तेल मिलाकर एक बल्ब जलाकर रात में खेत के बीच में रखे दें। प्रकाश से कीट आकर्षित होकर उसी घोल पर गिरकर मर जायेंगें। इस प्रपंश से अनेक प्रकार के हानिकारक कीटों का नाश होगा।

13.गेंदे की नई फसल की रोपाई के लिए यह मौसम अनुकूल है।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक 

   डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

     डा.देब कुमार दास(प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)   

डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)

डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग) 

डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग