मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

कृषि भौतिकी संभाग

             भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

       (दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in

साल-25, क्रमांक:- 23/2018-19/मंग.   समय:   अपराह्न  2.30 बजे     दिनांक:19-06-2018

बीते सप्ताह का मौसम (13 से 19 जून 2018)

     सप्ताह के दौरान आसमान में आंशिक रूप से बादल रहे। दिन का अधिकतम तापमान 36.4 से 41.6 डिग्री सेल्सियस(साप्ताहिक सामान्य 38.4 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 24.4 से 33.0 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 27.0 डिग्री सेल्सियस)रहा।इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 56 से 74 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 35 से 56 प्रतिशत दर्ज की गई।सप्ताह के दौरान दिन में औसत 2.5 घंटे प्रतिदिन(साप्ताहिक सामान्य 7.6 घंटे)धूप खिली रही।हवा की औसत गति 10.8 कि.मी. प्रतिघंटा(साप्ताहिक  सामान्य 7.5 कि.मी. प्रतिघंटा)तथा वाष्पीकरण की औसत दर 7.8 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 10.7 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न तथा अपराह्न को हवा अधिकतर पश्चिमी दिशाओं से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमीतत्व/दिनांक

20-06-18

21-06-18

22-06-18

23-06-18

24-06-18

वर्षा (मि.मी.)

0.0

0.0

0.0

0.0

   0.0

अधिकतमतापमान {°सेल्सियस}

40

41

42

42

   42

न्यूनतमतापमान {° सेल्सियस}

28

29

30

   30

30

बादलोंकीस्थिति (ओक्टा)

    2

 2

  3

 4

 4

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

70

70

75

75

75

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

40

35

40

40

40

हवाकीगति (कि.मी/घंटा)

  15

15

10

    20

25

हवाकीदिशा

उत्तर-उत्तर

-पश्चिम            

उत्तर-उत्तर

-पश्चिम

पश्चिम-उत्तर- पश्चिम

पश्चिम-उत्तर

-पश्चिम

पश्चिम-उत्तर-   पश्चिम

विशेषमौसम

दिल्ली एनसीआर में 23, 24, 25 जून 2018 को आसमान में आंशिक रूप से बादल छाये रहेगें साथ में दिन के समय तीव्र सतही हवायें चलने की सम्भावना है।  





























साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह
24 जून, 2018 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

1.   वर्तमान मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानों को धान की नर्सरी को आतिशीघ्र तैयार करने की सलाह है। एक हैक्टेयर क्षेत्रफल में रोपाई करने हेतु लगभग 800-1000 वर्गमीटर क्षेत्रफल में पौध तैयार करना पर्याप्त होता है। नर्सरी के क्षेत्र को 1.25 से 1.5 मीटर चौडी तथा सुविधानुसार लम्बी क्यारियों में बाँटे। पौधशाला मेंबुवाई से पूर्व बीजोपचार के लिए 5.0 किलोग्राम बीज के लिए बावस्टिन 10-12 ग्राम और 1 ग्राम स्ट्रैप्टोसाइक्लिन को 10 लीटर पानी में घोल लें। आवश्यकतानुसार इस घोल को बनाकर इसमें 12-15 घण्टे के लिए बीज को डाल दें। उसके बाद बीज को बाहर निकालकर किसी छायादार स्थान में 24-36 घण्टे के लिए ढककर रखें और पानी का हल्का-हल्का छिडकाव करते रहें । बीज में अंकुर निकलने के बाद पौधशाला में छिडक दें । संकर किस्में:- पंत संकर धान 1, नरेन्द्र संकर धान 1, पी आर एच 10 । अधिक उपज देने वाली किस्में:- पूसा 44. पंत धान 4, पंत धान 10, पूसा 834, पूसा बासमती 1, पूसा इम्प्रूप्ड बासमती, पूसा सुगंध 5, पूसा सुगंध 4 (पूसा 1121), रनबीर बासमती, तरावडी बासमती ।

2.  जिन किसानों की धान की पौधशाला लग गयी हो वे ब्लास्ट तथा भूरा धब्बा रोग के लिए पौधशाला की निगरानी करते रहें तथा लक्षण पाये जाने पर कार्बेन्डिजम 2.0 ग्राम/लीटर पानी घोल कर छिडकाव करें।

3.   धान की पौधशाला मे यदि पौधों का रंग पीला पड रहा है तो इसमे लौह तत्व की कमी हो सकती है। पौधों की ऊपरी पत्तियॉ यदि पीली और नीचे की हरी हो तो यह लौह तत्व की कमी दर्शाता है। इसके लिए 0.5 % फेरस सल्फेट +0.25 % चूने के घोल का छिडकाव करें।

4.   इस मौसममें किसान मक्का फसल की बुवाई के लिए खेतो को तैयार करें। संकर किस्में ए एच-421 व ए एच-58 तथा उन्नत किस्में पूसा कम्पोजिट-3,पूसा कम्पोजिट-4 बीज किसी प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें।बीज की मात्रा 20 किलोग्राम/हैक्टर रखें। पंक्ति-पंक्ति की दूरी 60-75 से.मी. तथा पौधे से पौधे की दूरी 18-25 से.मी. रखें। मक्का में खरपतवार नियंत्रण के लिए एट्राजिन 1 से 1.5 किलोग्राम/हैक्टर 800 लीटर पानी में घोल कर छिडकाव करें।

5.   यह समय चारे के लिए ज्वार की बुवाई के लिए उप्युक्त हैं अतःकिसानपूसा चरी-9, पूसा चरी-6 या अन्य सकंर किस्मों की बुवाई करें बीज की मात्रा 40 किलोग्राम/हैक्टर रखें तथा लोबिया की बुवाई का भी यह उप्युक्त समय है।

6.   यह समय मिर्च, बैंगन व फूलगोभी (सितम्बर में तैयार होने वाली किस्में)की पौधशाला बनाने के लिए उपयुक्त है।किसान भाई पौधशाला में कीट अवरोधी नाईलोन की जाली का प्रयोग करें,ताकि रोग फैलाने वाले कीटों से फसल को बचा सकें। पौधशाला को तेज धूप से बचाने के लिए छायादार नेट द्वारा 6.5 फीट की ऊँचाई पर ढक सकते है। बीजों को केप्टान (2.0 ग्राम/ कि.ग्रा बीज)के उपचार के बाद पौधशाला में बुवाई करें।

7.   जिन किसानोंकी मिर्च, बैंगन वफूलगोभी की पौध तैयार है, वे मौसम को मध्यनजर रखते हुए रोपाई की तैयारी करें।

8.   कद्दूवर्गीय सब्जियोंकी वर्षाकालीन फसल की बुवाई करें लौकी की उन्नत किस्में पूसा नवीन,पूसा समृद्वि करेला की पूसा विशेष, पूसा दो मौसमी, सीताफल की पूसा विश्वास, पूसा विकास तुरई की पूसा चिकनी धारीदार, तुरई की पूसा नसदार तथा खीरा की पूसा उदय, पूसा बरखा आदि किस्मों की बुवाई करें।

9.   किसान कद्दूवर्गीय सब्जियोंमें फल मक्खी की निगरानी करते रहें इसके लिए मिथाइल यूजीनोल ट्रेप का प्रयोग कर सकते हैं। फल मक्खी के लक्षण पाये जाने पर रोगोर @ 2 मि.ली. + 10 ग्राम चीनी/गुड़ प्रति ली. पानी में मिलाकर 50 लीटर प्रति हैक्टर की दर से छिड़काव करें

10.मिर्च के खेत में विषाणु रोग से ग्रसित पौधों को उखाड़कर जमीन में गाड़ दें। उसके उपरांत इमिडाक्लोप्रिड @ 0.3 मि.ली./लीटर की दर से छिड़काव करें।

11.फलों के नऐ बाग लगाने वाले गड्डों की खुदाई कर उनको खुला छोड दें ताकि हानिकरक कीटो-रोगाणु तथा खरपतवार के बीज आदि नष्ट हो जावें।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक    

   डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

     डा.देब कुमार दास(प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)

डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)

डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग