मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

कृषि भौतिकी संभाग

       भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in

साल-25, क्रमांक:- 83/2018-19/शुक्र.               समय: अपराह्न  2.30 बजे          दिनांक:18-01-2019

बीते सप्ताह का मौसम (12 से 18 जनवरी, 2019)

        सप्ताह के दौरान आसमान में सुबह के समय हल्का कोहरा रहा। दिन का अधिकतम तापमान 17.2 से 22.2 डिग्री सेल्सियस(साप्ताहिक सामान्य 18.2 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 3.0 से 8.4 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 5.9 डिग्री सेल्सियस)रहा।इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 86 से 100 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 63 से 70 प्रतिशत दर्ज की गई।सप्ताह के दौरान दिन में औसत 2.7 घंटे प्रतिदिन(साप्ताहिक सामान्य 5.3 घंटे)धूप खिली रही।हवा की औसत गति 3.1 कि.मी. प्रतिघंटा(साप्ताहिक  सामान्य 3.4 कि.मी. प्रतिघंटा)तथा वाष्पीकरण की औसत दर 1.5 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 2.2 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न को हवा ज़्यादातर शांत रही तथा अपराह्न को हवा भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमीतत्व/दिनांक

19-01-19

20-01-19

21-01-19

22-01-19

23-01-19

वर्षा (मि.मी.)

0.0

 0.0

 15.0

5.0

3.0

अधिकतमतापमान {°सेल्सियस}

22

 23

20

19

19

न्यूनतमतापमान {° सेल्सियस}

05

 08

    11

12

10

बादलोंकीस्थिति (ओक्टा)

4

6

7

7

6

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

90

90

95

95

95

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

50

55

65

65

65

हवाकीगति (कि.मी/घंटा)

10

   10

    20

15

08

हवाकीदिशा

उत्तर-उत्तर- पश्चिम

पूर्व-उत्तर-पूर्व

दक्षिण-दक्षिण-पूर्व

दक्षिण-दक्षिण-पूर्व

पूर्व

साप्ताहिक संचयी वर्षा (मि.मी.)

                   23.0




























साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह
23 जनवरी, 2019 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

1.    आने वाले तीन दिनों में वर्षा की सम्भावना को देखते हूए किसानों को सलाह है कि खड़ी फसलों व सब्जियों में सिंचाई तथा किसी प्रकार का छिडकाव ना करें।

2.     गेहूँ की फसल में यदि दीमक का प्रकोप दिखाई दे तो बचाव हेतु किसान क्लोरपायरीफाँस 20 ई.सी. @ 2.0 ली. प्रति एकड़ सिंचाई के साथ दें।

3.     मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानों को सलाह है कि सरसों की फसल में चेंपा कीट की निरंतर निगरानी करते रहें। प्रारम्भिक अवस्था में प्रभावित भाग को काट कर नष्ट कर दे।

4.     चने की फसल में फली छेदक कीट की निगरानी हेतु फीरोमोन प्रपंश @ 3-4 प्रपंश प्रति एकड़ उन खेतों में लगाएं जहां पौधों में 20-25% फूल खिल गये हों। “T” अक्षर आकार के पक्षी बसेरा खेत के विभिन्न जगहों पर लगाए।

5.     मौसम को ध्यान में रखते हुएकिसानों को सलाह है कि मिर्च, टमाटर व बैंगन की पौधशाला पालीघरों में तैयार करें तथा कद्दूवर्गीय सब्जियों की अगेती फसल की पौध तैयार करने के लिए बीजों को छोटी पालीथीन के थेलों में भर कर पालीघरों में रखें।

6.       इस मौसम में तैयार बन्दगोभी, फूलगोभी, गांठगोभी आदि की रोपाई मेड़ों पर कर सकते हैं।

7.      इस मौसम में पालक, धनिया, मेथी की बुवाई कर सकते हैं। पत्तों के बढ़वार के लिए 20 कि.ग्रा. यूरिया प्रति एकड़ की दर से छिड़काव कर सकते हैं।

8.   यह मौसम गाजर का बीज बनाने के लिए उपयुक्त है अत: जिन किसानों ने फसल के लिए उन्नत किस्मों की उच्च गुणवत्ता वाले बीज का प्रयोग किया है तथा फसल 90-105 दिन की होने वाली है,वे जनवरी माह के प्रथम पखवाडें में खुदाई करते समय अच्छी, लम्बी गाजर का चुनाव करें, जिनमे पत्ते कम हो। इन गाजरों के पत्तो को 4 इंच का छोड़ कर उपर से काट दें। गाजरों का भी उपरी 4 इंच हिस्सा रखकर बाकी को काट दें। अब इन बीज वाली गाजरों को 45 से.मी. की दूरी पर कतारों में 6 इंच के अंतराल पर लगाकर पानी लगाए।

9.     इस मौसम में तैयार खेतों में प्याज की रोपाई करें। रोपाई वाले पौधे छ: सप्ताह से ज्यादा के नही होने चाहिए। पौधों को छोटी क्यारियों में रोपाई करें। रोपाई से 10-15 दिन पूर्व खेत में 20-25 टन सड़ी गोबर की खाद डालें। 20 कि.ग्रा. नत्रजन, 60-70 कि.ग्रा. फ़ॉस्फोरस तथा 80-100 कि.ग्रा. पोटाश आखिरी जुताई में ड़ालें। पौधों की रोपाई अधिक गहराई में ना करें तथा कतार से कतार की दूरी 15 से.मी. पौधे से पौधे की दूरी 10 से.मी. रखें।

10.  इस मौसम में प्याज की समय से बोयी गई फसल में थ्रिप्स के आक्रमण की निरंतर निगरानी करते रहें। कीट के अधिक पाये जाने पर इमिडाक्लोप्रिड @ 0.5 मिली./ली. पानी किसी चिपकने वाले पदार्थ जैसे टीपोल आदि(1.0 ग्रा. प्रति एक लीटर घोल) में मिलाकर छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।

11.    गोभीवर्गीय फसल मेंहीरा पीठ इल्ली, मटर में फली छेदक तथा टमाटर में फल छेदक की निगरानी हेतु फीरोमोन प्रपंश @ 3-4 प्रपंश प्रति एकड खेतों में लगाएं।

12.   इस मौसम में मिली बग के बच्चे जमीन से निकलकर आम के तनों पर चढ़ेगें, इसको रोकने हेतु किसान जमीन से 0.5 मीटर की ऊंचाई पर आम के तने के चारों तरफ 25 से 30 से.मी. चौड़ी अल्काथीन की पट्टी लपेटे। तने के आस-पास की मिट्टी की खुदाई करें जिससे उनके अंडे नष्ट हो जायेंगे।

13.   इस मौसम में गेंदे में कलिका तथा पूष्प सड़न रोग के आक्रमण की सम्भावना बढ जाती है, अत: किसान फसल की निगरानी करते रहें। यदि लक्षण दिखाई दें तो बाविस्टिन 1 ग्राम/लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव आसमान साफ होने पर करें।

  सलाहकार समिति के वैज्ञानिक  

   डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

     डा.देब कुमार दास(प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)

डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग) 

डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग