मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

कृषि भौतिकी संभाग

         भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in

साल-25, क्रमांक:- 93/2018-19/शुक्र.               समय: अपराह्न  2.30 बजे          दिनांक:22-02-2019

बीते सप्ताह का मौसम (16 से 22 फरवरी, 2019)

        सप्ताह के दौरान आसमान में सुबह के समय हल्का कोहरा रहा। 19 फरवरी को 3.8 मि.मी वर्षा संस्थान की वैधशाला मे दर्ज की गई। दिन का अधिकतम तापमान 19.0 से 26.0 डिग्री सेल्सियस(साप्ताहिक सामान्य 23.4 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 10.4 से 16.0 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 9.8 डिग्री सेल्सियस)रहा।इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 89 से 98 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 67 से 94 प्रतिशत दर्ज की गई।सप्ताह के दौरान दिन में औसत 2.7 घंटे प्रतिदिन(साप्ताहिक सामान्य 7.1 घंटे)धूप खिली रही।हवा की औसत गति 4.4 कि.मी. प्रतिघंटा(साप्ताहिक  सामान्य 4.7 कि.मी. प्रतिघंटा)तथा वाष्पीकरण की औसत दर 1.7 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 3.7 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न तथा अपराह्न को हवा भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमीतत्व/दिनांक

23-02-19

24-02-19

25-02-19

26-02-19

27-02-19

वर्षा (मि.मी.)

0.0

 0.0

 1.0

8.0

1.0

अधिकतमतापमान {°सेल्सियस}

24

 27

27

23

23

न्यूनतमतापमान {° सेल्सियस}

12

 11

    11

14

14

बादलोंकीस्थिति (ओक्टा)

4

4

5

8

5

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

90

90

95

100

95

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

55

55

55

70

65

हवाकीगति (कि.मी/घंटा)

20

    10

    10

15

10

हवाकीदिशा

उत्तर-उत्तर-पश्चिम

उत्तर-उत्तर-पश्चिम

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम

पूर्व-उत्तर-पूर्व

पूर्व-दक्षिण-पूर्व

साप्ताहिक संचयी वर्षा (मि.मी.)

                   10.0

विशेष

26 फरवरी को वर्षा के साथ कहीं-कहीं ओलावर्ष्टि का पूर्वानुमान है।































साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह
27 फरवरी, 2019 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

1.   26 फरवरी को वर्षा के साथ कहीं-कहीं ओलावर्ष्टि का पूर्वानुमान को देखते हूए किसानों को सलाह है कि वे सभी फसलों व सब्जियों में उचित प्रबंधन करें
2.   वर्षा पूर्वानुमान को मध्यनजर रखते हुए किसान सभी तरह के कीट-रोग नाशियों का छिड़काव ना करें।

3.   मौसम को ध्यान में रखते हुएगेहूँ की फसल में रोगों, विशेषकर रतुआ की निगरानी करते रहें। काला, भूरा रतुआ आने पर फसल में डाइथेन एम-45 2.5 ग्राम या कार्बनडीज़्म 1.0 ग्राम अथवा प्रोपिकोनेजोल 1.0 ग्राम/लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।

4.   चने की फसल में फली छेदक कीट की निगरानी हेतु फीरोमोन प्रपंश @ 3-4 प्रपंश प्रति एकड़ उन खेतों में लगाएं जहां पौधों में 30-40% फूल खिल गये हों। “T” अक्षर आकार के पक्षी बसेरा खेत के विभिन्न जगहों पर लगाए।

5.   तापमान तथा आर्द्रता को ध्यान में रखते हुएकिसान सब्जी फसलों, सरसों की पछेती फसल में चेपा के आक्रमण की निगरानी करें। यदि कीटों क़ी सख्याँ अधिक हो तो नियंत्रण के लिए सब्जियों में इमिडाक्लोप्रिड @ 0.25-0.5 मि.ली./ लीटर पानी की दर से सब्जियों की तुडाई के बाद छिडकाव आसमान साफ होने पर करें। सब्जियों की फसलों पर छिड़काव के बाद एक सप्ताह तक तुड़ाई न करें। बीज वाली सब्जियों पर चेपा के आक्रमण पर विशेष ध्यान दें।

6.   किसानों को सलाह है कि भिंडी की बुवाई हेतु ए-4, परबनी क्रांति, हिसार उन्नत, पंजाब पदमनी, अर्का अनामिका आदि किस्मों की बुवाई हेतु खेतों में गोबर की सड़ी खाद डालकर पलेवा कर तैयार करें। बीज की मात्रा 8-10 कि.ग्रा./एकड़ की व्यवस्था करें।

7.   फ्रेंच बीन (कंटेन्डर) सब्जी लोबिया (पूसा सुकोमल) इत्यादि की सीधी बुवाई हेतु वर्तमान तापमान अनुकूल है क्योंकि बीजों के अंकुरण के लिए यह तापमान उपयुक्त हैं। किसान उन्नत बीजों को किसी प्रमाणित स्रोत से ही प्राप्त करें।

8.   मौसम को ध्यान में रखते हुए किसान टमाटर, मिर्च की रोपाई समतल क्यारियों पर कर सकते हैं। तथा कद्दूवर्गीय सब्जियों के तैयार पौधों की रोपाई नाली की मैडो के मध्य पर करें।

9.   इस मौसम में प्याज की समय से बोयी गई फसल में थ्रिप्स के आक्रमण की निरंतर निगरानी करते रहें। कीट के पाये जाने पर इमिडाक्लोप्रिड @ 0.5 मिली./ ली. पानी किसी चिपकने वाले पदार्थ जैसे टीपोल आदि (1.0 ग्रा. प्रति एक लीटर घोल) में मिलाकर छिड़काव आसमान साफ होने पर करें।

10.  टमाटर के फलों को फली छेदक कीट से बचाव हेतु किसान खेत में पक्षी बसेरा लगाए। वे कीट से नष्ट फलों को इकट्ठा कर जमीन में दबा दें। साथ ही फल छेदक कीट की निगरानी हेतु फिरोमोन प्रपंश @ 2-3 प्रपंश प्रति एकड़ की दर से लगाएं तथा ल्योर को 15 दिनो बाद बदल देवे।

11.  बैंगन की फसल को प्ररोह एवं फल छेदक कीट से बचाव हेतु ग्रसित फलों तथा प्रोरहों को इकट्ठा कर नष्ट कर दें।यदि कीट की संख्या अधिक हो तो स्पिनोसेड कीटनाशी 48 ई.सी. @1 मि.ली./4 लीटर पानी की दर से छिडकाव आसमान साफ होने पर करें।

12.  मूंग और उड़द की फसलों की मार्च में बुवाई हेतु किसान उन्नत बीजों की बुवाई प्रारम्भ करें। मूंग पूसा विशाल, पूसा 9531, पी.डी एम-11, एस एम एल-668; उड़द पंत उड़द-19, पंत उड़द-30, पंत उड़द-35, पी डी यू-1। बुवाई से पूर्व बीजों को फसल विशेष राईजोबीयम तथा फास्फोरस सोलूबलाईजिंग बेक्टीरिया से अवश्य उपचारित करें।

13.  मौसम को ध्यान मे रखते हुए किसानों को सलाह है कि गेंदे की तैयार पौध की रोपाई करें तथा ग्रीष्मऋतु के लिये पौध (नर्सरी) तैयार करें।

14.  आम के बगीचो में यदि गुच्छा रोग दिखाई दे तो पुष्प गुच्छ को काट कर नष्ट कर देवे एवं फुदका कीट की निगरानी करें।

  सलाहकार समिति के वैज्ञानिक  

   डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

     डा.देब कुमार दास(प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)

डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग) 

डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग