मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

कृषि भौतिकी संभाग

           भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

   (दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in

साल-25, क्रमांक:- 59/2018-19/मंग.          समय: अपराह्न  2.30 बजे         दिनांक:23-10-2018

बीते सप्ताह का मौसम (17 से 23 अक्टूबर,2018)

        सप्ताह के दौरान आसमान साफ रहा।दिन का अधिकतम तापमान 30.6 से 34.2 डिग्री सेल्सियस(साप्ताहिक सामान्य 32.8 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 10.5 से 15.6 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 18.1 डिग्री सेल्सियस)रहा।इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 80 से 98 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 32 से 64 प्रतिशत दर्ज की गई।सप्ताह के दौरान दिन में औसत 5.9 घंटे प्रतिदिन(साप्ताहिक सामान्य 8.7 घंटे)धूप खिली रही।हवा की औसत गति 1.8 कि.मी. प्रतिघंटा(साप्ताहिक  सामान्य 4.8 कि.मी. प्रतिघंटा)तथा वाष्पीकरण की औसत दर 3.8 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 6.3 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न को हवा ज़्यादातर शांत रही तथा अपराह्न को भिन्न-भिन्न दिशाओ से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमीतत्व/दिनांक

24-10-18

25-10-18

26-10-18

27-10-18

28-10-18

वर्षा (मि.मी.)

0.0

1.0

0.0

0.0

0.0

अधिकतमतापमान {°सेल्सियस}

32

31

31

32

31

न्यूनतमतापमान {° सेल्सियस}

18

18

    16

16

17

बादलोंकीस्थिति (ओक्टा)

4

4

2

1

1

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

90

90

85

85

80

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

30

30

25

25

20

हवाकीगति (कि.मी/घंटा)

05

   05

    00

05

05

हवाकीदिशा

पूर्व-दक्षिण-पूर्व

पूर्व-दक्षिण-पूर्व

पूर्व-दक्षिण-पूर्व

पूर्व-दक्षिण-पूर्व

पूर्व-दक्षिण-पूर्व

साप्ताहिक संचयी वर्षा (मि.मी.)

                   0.0


























साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह
28 अक्टूबर, 2018 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

1.   मौसम को ध्यान में रखते हुए धान की फसल यदि कटाई योग्य हो गयी तो कटाई शुरू करें। फसल कटाई के बाद फसल को 2-3 दिन खेत में सुखाकर गहाई कर लें। उसके बाद दानों को अच्छी प्रकार से धूप में सूखा लें। भण्डारण के पूर्व दानों में नमी 12 प्रतिशत से कम होनी चाहिए।

2.   मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानों को सलाह है कि धान की पकने वाली फसल की कटाई से दो सप्ताह पूर्व सिचाई बंद कर दें। फसल कटाई के बाद फसल को 2-3 दिन खेत में सूखाकर गहाई कर लें। उसके बाद दानों को अच्छी प्रकार से धूप में सूखा लें।

3.   किसान मौसम को ध्यान में रखते हुए गेंहू की बुवाई हेतू खाली खेतों को तैयार करें तथा उन्नत बीज व खाद की व्यवस्था करें। उन्नत प्रजातियाँ- सिंचित परिस्थिति- श्रेष्ठ (एच. डी. 2687), पूसा विशेष (एच. डी. 2851),  पूसा गेहूँ -109 (एच. डी. 2894), पूसा सिंधु गंगा(एच. डी. 2967), एच. डी. 3086, डी. बी. डब्लू .-17 बीज की मात्रा 100 कि.ग्रा. प्रति हैक्टेयर रखें। जिन खेतों में दीमक का प्रकोप हो तो क्लोरपाईरिफाँस (20 ईसी) @ 5 लीटर/हैक्टर की दर से पलेवा के साथ दें। नत्रजन, फास्फोरस तथा पोटाश उर्वरकों की मात्रा 120, 50 व 40 कि.ग्रा./हैक्टेयर होनी चाहिये।

4.   तापमान को ध्यान में रखते हुए किसान सरसों की बुवाई में ओर अधिक देरी न करें। बीज दर –1.5-2.0 कि.ग्रा. प्रति एकड। बुवाई से पहले खेत में नमी के स्तर को अवश्य ज्ञात कर ले ताकि अंकुरण प्रभावित न हो। बुवाई से पहले बीजों को थीरम या केप्टान @ 2 से 2.5 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचार करें। बुवाई कतारों में करना अधिक लाभकारी रहता है। कम फैलने वाली किस्मों की बुवाई 30 सें. मी. और अधिक फैलने वाली किस्मों की बुवाई 45-50 सें.मी. दूरी पर बनी पंक्तियों में करें। विरलीकरण द्वारा पौधे से पौधे की दूरी 12-15 सें.मी. कर ले। मिट्टी जांच के बाद यदि गंधक की कमी हो तो 20 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर की दर से अंतिम जुताई पर डालें।

5.    किसान चने की बुवाई इस सप्ताह कर सकते है। छोटी एवं मध्यम आकार के दाने वाली किस्मों के लिए 6080 कि.ग्रा. तथा बड़े दाने वाली किस्मों के लिए 80100 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर बीज की आवश्यकता होती है। बुवाई 3035 सें. मी. दूर कतारों में करनी चाहिए। प्रमुख काबुली किस्में- पूसा 267, पूसा 1003, पूसा चमत्कार; देशी किस्में सी. 235, पूसा 246, पी.बी.जी. 1, पूसा 372। बुवाई से पूर्व बीजों को राइजोबियम और पी.एस.बी. के टीकों (कल्चर) से अवश्य उपचार करें।

6.   किसान इस मौसम में जई तथा बरसीम की बुवाई कर सकते हैं। जई की उन्नत किस्में- जे.एच.ओ.-822, ओ.एल.-9 और पूसा ओट-5 तथा बरसीम की उन्नत किस्में- वरदान, बुंदेल बरसीम-1, मसकावी, जे.बी.-3. बीज दरजई- 80-100 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर और बरसीम- 25-30 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर।

7.   तापमान को ध्यान में रखते हुए मटर की बुवाई में ओर अधिक देरी न करें अन्यथा फसल की उपज में कमी होगीतथा कीड़ों का प्रकोप अधिक हो सकता है। उन्नत किस्में - पूसा प्रगति, आर्किल, आजाद मटर-3, पंत मटर-3, बोनविले। बीजों को कवकनाशी  केप्टान या थीरम @ 2.0 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से मिलाकर उपचार करें उसके बाद फसल विशेष राईजोबियम का टीका अवश्य लगायें। गुड़ को पानी में उबालकर ठंडा कर ले और राईजोबियम को बीज के साथ मिलाकर उपचारित करके सूखने के लिए किसी छायेदार स्थान में रख दे तथा अगले दिन बुवाई करें।

8.   किसान इस समय लहसुन की बुवाई कर सकते हैं। उन्नत किस्में जी-1, जी-41, जी-50, जी-282.| खेत में देसी खाद और फास्फोरस उर्वरक अवश्य डालें।

9.   आलू की बुवाई से किसानों को अधिक लाभ की प्राप्ति हो सकती है, क्योंकि यह फसल 80-90 दिन में तैयार हो जाती है। यह मौसम आलू की बुवाई के लिए अनुकुल है। उन्नत किस्म– कुफरी बादशाह, कुफरी बहार, कुफरी आनन्द, चिपसोना-1, चिपसोना-2, चिपसोना-3 ।  

10.किसान इस समय सरसों साग- पूसा साग-1, मूली-जापानी व्हाईट,हिल क्वीन, पूसा मृदुला (फ्रेच मूली); पालक-आल ग्रीन,पूसा भारती; शलगम-पूसा स्वेती या स्थानीय लाल किस्म;बथुआ- पूसा बथुआ-1; मेथी-पूसा कसुरी; गांठ गोभी-व्हाईट वियना,पर्पल वियना; तथा धनिया-पंत हरितमा या संकर किस्मोंकी बुवाई मेड़ों(उथली क्यारियों) पर करें।

11.वर्तमान मौसम प्याज की बुवाई के लिए अनुकूल है। बीज दर– 10 कि.ग्रा. प्रति हैक्टर। बुवाई से पहले बीजों को केप्टान @ 2.5 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचार अवश्य करें।

12.यह समय ब्रोकली, पछेती फूलगोभी, बन्दगोभी तथा टमाटर की पौधशाला तैयार करने के लिए उपयुक्त है। पौधशाला भूमि से उठी हुई क्यारियों पर ही बनायें। जिन किसान भाईयों की पौधशाला तैयार है, वह मौसस को ध्यान में रखते हुये पौध की रोपाई ऊंची मेड़ों पर करें।

13.गुलदाउदी, गैदें की तैयार पौध की मेड़ों पर रोपाई करें। ग्लेडिओलस की बीजों द्वारा बुवाई इस समय करें।

14.रबी की फसलों की बुवाई से पहले किसान अपने-अपने खेतों को अच्छी प्रकार से साफ-सुथरा करें। मेड़ों, नालों, खेत के रास्तों तथा खाली खेतों को साफ-सुथरा करें ताकि कीटों के अंडे, रोगों के कारक नष्ट हो  सके  तथा खेत में सड़े गोबर की खाद का उपयोग करें क्योंकि यह मृदा के भौतिक तथा जैविक गुणों को सुधारती है तथा मृदा की जल धारण क्षमता भी बढ़ाती है।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक    

   डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

     डा.देब कुमार दास(प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)   

डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)

डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)

डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग