मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

                                     कृषि भौतिकी संभाग                                    

  भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in

साल-24, क्रमांक :- 48/2017-18/मंग.      समय अपराह्न  2.30 बजे          दिनांक:19-09-2017

बीते सप्ताह का मौसम (13से 19 सितम्बर, 2017)

                     सप्ताह के दौरान आसमान में आंशिक रूप से बादल रहे।दिन का अधिकतम तापमान 31.4 से 36.2 डिग्री सेल्सियस(साप्ताहिक सामान्य 33.4 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 23.6 से 25.3 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 24.8 डिग्री सेल्सियस)रहा।इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 82 से 94 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 40 से 63 प्रतिशत दर्ज की गई।सप्ताह के दौरान दिन में औसत 5.8 घंटे प्रतिदिन(साप्ताहिक सामान्य 7.6 घंटे)धूप खिली रही।हवा की औसत गति 4.2 कि.मी प्रतिघंटा(साप्ताहिक  सामान्य 5.0 कि.मी. प्रतिघंटा)तथा वाष्पीकरण की औसत दर 4.2 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 6.4 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न को हवा ज्यादातर शांत रही तथा अपराह्न को उत्तर तथा उत्तर-पश्चिमी दिशाओं से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमीतत्व/दिनांक

20-09-17

21-09-17

22-09-17

23-09-17

24-09-17

वर्षा (मि.मी.)

  0.0

 0.0

 15.0

  8.0

   1.0

अधिकतमतापमान {°सेल्सियस}

 35

 33

 30

   32

   33

न्यूनतमतापमान {° सेल्सियस}

 26

 27

 24

   25

 25

बादलोंकीस्थिति (ओक्टा)

 4

 7

 8

 8

 8

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

 80

 85

 95

 90

 85

सापेक्षिकआर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

 45

 50

 60

 55

 45

हवाकीगति (कि.मी/घंटा)

 09

 07

 15

 12

   11

11हवाकीदिशा

पूर्व-दक्षिण- पूर्व

दक्षिण-दक्षिण-पूर्व

पूर्व

  पूर्व-उत्तर-पूर्व

उत्तर-पूर्व

साप्ताहिक संचयी वर्षा (मि.मी.)

                                  24.0           























साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह
24 सितम्बर, 2017 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

1.   धान की फसल इस समय बालियाँ निकलने वाली अवस्था में है अत: धान के ब्लास्ट (बदरा) रोग के आक्रमण की निगरानी नियमित रूप से करें। पत्तियों में एक छोटी आँख जैसा धब्बा जिसके अन्दर का भाग हल्का भूरा और बाहर गहरे भूरे रंग का होना इस रोग का सूचक है। आगे चलकर यह अनेक धब्बे मिलकर एक बड़ा धब्बा बन जाता है।

2.    धान की फसल इस समय मुख्यत: बाली बनने वाली स्थिति में है अत: फसल में कीटों की निगरानी करें। तना छेदक कीट की निगरानी हेतू फिरोमोन प्रपंच @ 3-4/ एकड़ लगाए। यदि तना छेदक कीट का प्रकोप अधिक हो तो करटादवाई 4% दानें या कार्बोफूरान 3 % दानें 10 किलोग्राम/एकड़ का बुरकाव करें।

3.   इस समय धान की फसल को नष्ट करने वाली ब्राउन प्लांट होपरका आक्रमण आरंभ हो सकता है अतः किसान खेत के अंदर जाकर पौध के निचली भाग के स्थान पर मच्छरनुमा कीट का निरीक्षण करें। यदि प्रकोप दिखाई दें तो इमिडाक्लोप्रिड दवाई 1.0 मि. ली./3 लीटर पानी या फेनोबुकार्ब 50 ई.सी. @ 1 मि. ली./लीटर या बुप्रोफेजिन 25 ई.सी. @ 2 मि. ली./लीटर पानी में मिलाकर छिड़­काव करें।

4.   जिन किसानों की हरी प्याज की पौध तैयार हैं वे रोपाई मेड़ों(उथली क्यारियों) पर करें। जिनको पौधशाला तैयार करनी है  तो पौधशाला जमीन से थोड़ा ऊपर बनाये।

5.   अगेती आलू की बुवाई से किसानों को अधिक लाभ की प्राप्ति हो सकती है, क्योंकि यह फसल 80-90 दिन में तैयार हो जाती है। उन्नत किस्म- कुफरी बादशाह, कुफरी सुर्या, इसके बाद रबी की कोई अन्य फसल जैसे पछेता गेहूँ को लिया जा सकता है।

6.   इस समय अगेती मटर की बुवाई के लिए बीज की व्यवस्था करें (उन्नत किस्में- पूसा प्रगति, पंत मटर-3 तथा आर्किल) तथा खेतों को तैयार करें।

7.   इस मौसम में किसान गाजर की बुवाई मेड़ो पर कर सकते हैं। उन्नत किस्में- पूसा रूधिरा । बीज दर 4.0 कि.ग्रा. प्रति एकड़। बुवाई से पूर्व बीज को केप्टान @ 2 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज की दर से उपचार करें तथा खेत में देसी खाद, पोटाश और फास्फोरस उर्वरक अवश्य डालें अच्छे अंकुरण के लिए मृदा मे उचित नमी का होना आवश्यक है।

8.   सब्जियों में (टमाटर, मिर्च, बैंगन फूलगोभी पत्तागोभी) फल छेदक, शीर्ष छेदक एवं फूलगोभी पत्तागोभी में डायमं बेक मोथ की निगरानी हेतू फिरोमोन प्रपंच @ 3-4/एकड़ लगाए तथा प्रकोप अधिक दिखाई दे तो स्पेनोसे दवाई 1.0 मि.ली./4 लीटर पानी में मिलाकर छिड़­काव करें।

9.   किसान इस समय सरसों साग- पूसा साग-1, मूली-जापानी व्हाईट,हिल क्वीन, पूसा मृदुला (फ्रेच मूली); पालक-आल ग्रीन, पूसा भारती; शलगम-पूसा स्वेती या स्थानीय लाल किस्म; बथुआ- पूसा बथुआ-1; मेथी-पूसा कसुरी; गांठ गोभी- व्हाईट वियना, पर्पल वियना तथा धनिया-पंत हरितमा या संकर किस्मोंकी बुवाई मेड़ों पर करें।

10.  कद्दूवर्गीय सब्जियों में फल मक्खी की निगरानी करते रहें इसके लिए मिथाइल यूजीनोल ट्रेप का प्रयोग कर सकते हैं फल मक्खी के बचाव हेतू खेत में विभिन्न जगहो पर गुड़ या चीनी के साथ मैलाथियान (Malathion0.1 %)  का घोल बनाकर छोटे कप या किसी और बरतन में रख दें ताकि फल मक्खी का नियंत्रण हो सके।

11.  मिर्च तथा टमाटर के खेतों में विषाणु रोग से ग्रसित पौधों को उखाड़कर जमीन में गाड़ दें। यदि प्रकोप अधिक है तो इमिडाक्लोप्रिड़ @ 0.3 मि.ली. प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें।

12.  भिंडी, मिर्च तथा बैंगन की फसल में माईट, जैसिड और होपर  की निरंतर निगरानी करते रहें। अधिक माईट पाये जाने पर फासमाईट @ 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी तथा जैसिड और होपर कीट के रोकथाम के लिए रोगोर कीटनाशक @ 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें।

13.  सरसों की अगेती बुवाई के लिए पूसा सरसों-25, पूसा सरसों-26, पूसा अगर्णी, पूसा तारक, पूसा महक के बीज की व्यवस्था करें तथा खेतों को तैयार करें।

14.  इस समय फसलों व सब्जियों में दीमक का प्रकोप होने की संभावना रहती है अतः किसान भाई फसल की निगरानी करें यदि प्रकोप दिखाई दे तो क्लोरपाइरीफाँस 20 ई सी @ 4.0 मि.ली/लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें

15.  कीटों की रोकथाम के लिए प्रकाश प्रपंश (Light trap) का भी इस्तेमाल कर सकते है। इसके लिए एक प्लास्टिक के टब या किसी बड़े बरतन में पानी और थोडा मिट्टी का तेल या थोडा रोगोर मिलाकर एक बल्ब जलाकर रात में खेत के बीच में रखे दें। प्रकाश से कीट आकर्षित होकर उसी घोल पर गिरकर मर जायेंगें। इस प्रपंश से अनेक प्रकार के हानिकारक कीटों का नाश होगा।

16.  गेंदे की नई फसल की रोपाई के लिए यह मौसम अनुकूल है।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक  

   डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

     डा.देब कुमार दास(प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक,केटेट)

डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग) 

डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)