मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

कृषि भौतिकी संभाग

भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in

साल-23, क्रमांक :- 84/2016-17/शुक्र. समयअपराह्न  2.30 बजे      दिनांक:20-01-2017

बीते सप्ताह का मौसम (14 से 20 जनवरी, 2017)

         बीते सप्ताह के दौरान सुबह के समय हल्की धुंध दिखाई दी। दिन का अधिकतम तापमान 14.8 से 22.0 डिग्री सेल्सियस(साप्ताहिक सामान्य 18.2 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 1.0 से 9.0 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 5.9 डिग्री सेल्सियस)रहा।इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 86 से 97 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 33 से 90 प्रतिशत दर्ज की गई।सप्ताह के दौरान दिन में औसत 4.3 घंटे प्रतिदिन(साप्ताहिक सामान्य 5.3 घंटे)धूप खिली रही।हवा की औसत गति 4.6 कि.मी. प्रतिघंटा(साप्ताहिक  सामान्य 3.4 कि.मी. प्रतिघंटा)तथा वाष्पीकरण की औसत दर 2.3 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 2.2 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न को हवा अधिकतर शांत रही तथा अपराह्न को उत्तर-पश्चिमी दिशाओ से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, सफदरजंग विमानपत्तन, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमी तत्व/दिनांक

21-01-17

22-01-17

23-01-17

24-01-17

25-01-17

वर्षा (मि.मी.)

0.0

0.0

0.0

0.0

1.0

अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}

21

22

23

24

  25

न्यूनतम तापमान {° सेल्सियस}

08

10

10

10

12

बादलों की स्थिति (ओक्टा)

5

3

3

4

5

सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

95

95

95

100

100

सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

50

45

40

50

50

हवा की गति (कि.मी/घंटा)

10

08

07

05

09

हवा की दिशा

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम

उत्तर-उत्तर-पश्चिम

उत्तर-उत्तर-पश्चिम

उत्तर-उत्तर-पूर्व

पूर्व-दक्षिण- पूर्व






















साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह
25 जनवरी, 2017 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

1.   समय से बोयी गयी गेहूँ में दूसरी सिंचाई करें। सिंचाई के लिए गेहूँ की दूसरी क्रांति अवस्था जो प्राय बुवाई के 42-45 दिन के बाद आती है जब फसल में कल्ले बनते हैं।

2.   गेहूँ की फसल में यदि दीमक का प्रकोप दिखाई दे तो बचाव हेतु किसान क्लोरपायरीफाँस 20 ई.सी. @ 2.0 ली. प्रति एकड़ सिंचाई के साथ दें।

3.   मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानों को सलाह है कि सरसों की फसल में इस समय दानो का विकास हो रहा है अत: नमी की कमी ना हो इसलिए आवश्यकतानुसार सिंचाई करें।

4.   चने की फसल में फली छेदक कीट की निगरानी हेतु फीरोमोन प्रपंश @ 3-4 प्रपंश प्रति एकड़ उन खेतों में लगाएं जहां पौधों में 20-25% फूल खिल गये हों। “T” अक्षर आकार के पक्षी बसेरा खेत के विभिन्न जगहों पर लगाए।

5.   मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानों को सलाह है कि मिर्च, टमाटर व बैंगन की पौधशाला पालीघरों में तैयार करें तथा कद्दूवर्गीय सब्जियों की अगेती फसल की पौध तैयार करने के लिए बीजों को छोटी पालीथीन के थेलों में भर कर पालीघरों में जमाव के लिए रखें।

6.   इस मौसम में तैयार बन्दगोभी, फूलगोभी, गांठगोभी आदि की रोपाई मेड़ों पर कर सकते हैं।

7.   इस मौसम में पालक, धनिया, मेथी की बुवाई कर सकते हैं। पत्तों के बढ़वार के लिए 20 कि.ग्रा. यूरिया प्रति एकड़ की दर से छिड़काव कर सकते हैं।

8.   यह मौसम गाजर का बीज बनाने के लिए उपयुक्त है अत: जिन किसान भाईयों ने फसल के लिए उन्नत किस्मों की उच्च गुणवत्ता वाले बीज का प्रयोग किया है तथा फसल 90-105 दिन की होने वाली है,वे जनवरी माह के प्रथम पखवाडें में खुदाई करते समय अच्छी, लम्बी गाजर का चुनाव करें, जिनमे पत्ते कम हो। इन गाजरों के पत्तो को 4 इंच का छोड़ कर उपर से काट दें। गाजरों का भी उपरी 4 इंच हिस्सा रखकर बाकी को काट दें। अब इन बीज वाली गाजरों को 45 से.मी. की दूरी पर कतारों में 6 इंच के अंतराल पर लगाकर पानी लगाए।

9.   इस मौसम में तैयार खेतों में प्याज की रोपाई करें। रोपाई वाले पौधे छ: सप्ताह से ज्यादा के नही होने चाहिए। पौधों को छोटी क्यारियों में रोपाई करें। 20 कि.ग्रा. नत्रजन, 60-70 कि.ग्रा. फ़ॉस्फोरस तथा 80-100 कि.ग्रा. पोटाश आखिरी जुताई में ड़ालें। पौधों की रोपाई अधिक गहराई में ना करें तथा कतार से कतार की दूरी 15 से.मी. पौधे से पौधे की दूरी 10 से.मी. रखें। प्याज की फसल में हल्की सिंचाई की आवश्यकता होती है अत: 10-12 दिन के अंतराल पर आवश्यकतानुसार सिंचाई करें।

10.गोभीवर्गीय फसल मेंहीरा पीठ इल्ली, मटर में फली छेदक तथा टमाटर में फल छेदक की निगरानी हेतु फीरोमोन प्रपंश @ 3-4 प्रपंश प्रति एकड खेतों में लगाएं।

11.इस मौसम में मिली बग के बच्चे जमीन से निकलकर आम के तनों पर चढ़ेगें, इसको रोकने हेतु किसान भाई जमीन से 0.5 मीटर की ऊंचाई पर आम के तने के चारों तरफ 25 से 30 से.मी. चौड़ी अल्काथीन की पट्टी लपेटे। तने के आस-पास की मिट्टी की खुदाई करें जिससे उनके अंडे नष्ट हो जायेंगे।

12.इस मौसम में गेंदे में कलिका तथा पूष्प सड़न रोग के आक्रमण की सम्भावना बढ जाती है, अत: किसान भाई फसल की निगरानी करते रहें। यदि लक्षण दिखाई दें तो बाविस्टिन 1 ग्राम\लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करें।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक    

   डा.अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

     डा.देब कुमार दास(वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक,केटेट)

डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)

डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग