मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

कृषि भौतिकी संभाग

    भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in

साल-26, क्रमांक:- 31/2019-20/मंग.           समय: अपराह्न  2.30 बजे              दिनांक: 16-07-2019

बीते सप्ताह का मौसम (10 से 16 जुलाई2019)

        सप्ताह के दौरान आसमान में हल्के बादल रहे। 10 जुलाई को 7.0 मि.मी तथा 16 जुलाई को 20.4 मि.मी वर्षा संस्थान की वैधशाला मे दर्ज की गई। दिन का अधिकतम तापमान 32.8 से 44.8 डिग्री सेल्सियस(साप्ताहिक सामान्य 36.1 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 22.4 से 30.9 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 27.0 डिग्री सेल्सियस)रहा।इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 65 से 91 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 37 से 83 प्रतिशत दर्ज की गई।सप्ताह के दौरान दिन में औसत 0.5 घंटे प्रतिदिन(साप्ताहिक सामान्य 6.4 घंटे)धूप खिली रही।हवा की औसत गति 8.3 कि.मी. प्रतिघंटा(साप्ताहिक सामान्य 6.4 कि.मी. प्रतिघंटा) तथा वाष्पीकरण की औसत दर 6.1 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 7.4 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न तथा अपराह्न को हवा पश्चिम दिशाओं से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली  से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमी तत्व/दिनांक

17-07-19

18-07-19

19-07-19

20-07-19

21-07-19

वर्षा (मि.मी.)

4.0

4.0

2.0

1.0

1.0

अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}

33

33

33

34

35

न्यूनतम तापमान {° सेल्सियस}

24

24

25

25

26

बादलों की स्थिति (ओक्टा)

7

7

6

6

5

सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

95

90

90

85

85

सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

65

65

65

60

60

हवा की गति (कि.मी/घंटा)

10

6

5

5

6

हवा की दिशा

पूर्व

दक्षिण-दक्षिण

-पूर्व-

दक्षिण

उत्तर-उत्तर

-पश्चिम-

दक्षिण-दक्षिण

-पूर्व-

साप्ताहिक संचयी वर्षा (मि.मी.)

                                                       12.0

विशेष

 
 

























साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह
21 जुलाई, 2019 तक के लिए

कृषि परामर्श सेवाओं, कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

1.   वर्षा को ध्यान में रखते हुये किसानजिनकी धान की नर्सरी 20-25 दिन की हो गई हो वे इस समय धान की रोपाई करें। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 20 सेमी तथा पौध से पौध की दूरी 10 सेमी रखें। उर्वरकों में 100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस, 40 किलोग्राम पोटाश और 25 किलोग्राम जिंक सल्फेट/ हैक्टर की दर से डाले, तथा नील हरित शैवाल एक पेकेट/एकड़ का प्रयोग उन्ही खेतो में करें जहाँ पानी खड़ा रहता हो, ताकि मृदा में नाइट्रोजन की मात्रा बढाई जा सकें।

2.  वर्तमान मौसम को ध्यान में रखते हूये किसानइस सप्ताह मक्का की बुवाई करें। संकर किस्में ए एच-421 व ए एच-58 तथा उन्नत किस्में पूसा कम्पोजिट-3, पूसा कम्पोजिट-4 की बुवाई शुरु कर सकते है। बीज की मात्रा 20 किलोग्राम/हैक्टर रखें। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 60-75 से.मी. तथा पौधे से पौधे की दूरी 18-25 से.मी. रखें। मक्का में खरपतवार नियंत्रण के लिए एट्राजिन 1 से 1.5 किलोग्राम/ हैक्टर 800 लीटर पानी में घोल कर छिडकाव करें।

3.   इस मौसम में किसान कपास में रस चूसने वाले कीटों से बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड कीटनाशक 0.5 मि.ली./ली. पानी में मिलाकर छिड़काव मौसम साफ होने पर करें। अन्य कीटों से बचाव के लिए फेरोमोन ट्रेप (3-5 / एकड़ ) एवं प्रकाश प्रपंच का उपयोग कर सकते है।

4.   यह मौसम बेबी कार्न की किस्म एच एम-4 तथा स्वीट कार्न की बुवाई के लिए उत्तम है।

5.   मौसम को ध्यान में रखते हुएकिसान भाईयों को सलाह है कि बाजरे (किस्में-संकर बाजरा पूसा-605, संकर बाजरा पूसा-415, संकुल बाजरा पूसा-383, एच.एस.वी-67) की बुवाई शीघ्र शुरू करें। बीज को उपचारित करना आवश्यक है विशेष रूप से अरगट रोग के रोकथाम के लिए 10 % नमक के घोल में बीजों को भिगो दें तथा ऊपर आये हुए खराब व हल्के बीजों को निकालकर फेंक दें इसके उपरांत बीजों को थीरम या बावस्टिन दवाई 2.0 ग्राम/किलोग्राम की दर से उपचारित करे ताकि बीज जनित रोग खत्म हो जाय़ॆ।

6.   खरीफ की सभी फसलों में आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई करके खरपतवारों का नियंत्रण करें। इससे खरपतवारों द्वारा फसलों को कम हानि होती है तथा जल की बचत होती है और जड़ों का विकास अच्छा होता है।

7.   यह समय चारे के लिए ज्वार की बुवाई के लिए उपयुक्त हैं अतःकिसानपूसा चरी-9, पूसा चरी-6 या अन्य सकंर किस्मों की बुवाई करें बीज की मात्रा 40 किलोग्राम/हैक्टर रखें । लोबिया की बुवाई का भी यह उपयुक्त समय है।

8.   इस मौसममें किसान ग्वार(पूसा नव बहार, दुर्गा बहार), मूली (पूसा चेकी), लोबिया(पूसा सुकोमल), सेम (पूसा सेम 2, पूसा सेम 3), पालक (पूसा भारती), चौलाई (पूसा लाल चौलाई, पूसा किरण ) आदि फसलों की बुवाई के लिए खेत तैयार हो तो बुवाई कर सकते हैं। बीज किसी प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें।

9.   इस मौसममें कद्दूवर्गीय सब्जियोंजैसे लौकी (उन्नत किस्में पूसा नवीन,पूसा समृद्वि) करेला (पूसा विशेष, पूसा दो मौसमी), सीताफल (पूसा विश्वास, पूसा विकास), (तोरई की पूसा स्नेहा) किस्मों की बुवाई कर मचान पर चढ़ाऐं।

10.इस मौसममें कद्दूवर्गीय सब्जियोंमें फल मक्खी की निगरानी मिथाइल यूजीनोल ट्रेप के द्वारा कर सकते हैं। फल मक्खी के लक्षण पाये जाने पर इमिडाक्लोप्रिड़ 30.5 SL @ 0.25 मि.ली प्रति लीपानी में मिलाकर 50 लीटर प्रति हैक्टर की दर से छिड़काव आसमान साफ होने पर करें

11.इस मौसममें भिंडी, मिर्च तथा बेलवाली फसल में माईट, जैसिड और होपर  की निरंतर निगरानी करते रहें। अधिक कीट पाये जाने पर इमिडाक्लोप्रिड़ 17.8 SL @ 0.5  मि.ली./लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव आसमान साफ होने पर करें

12.इस मौसम में फलों के नऐ बाग लगाने वाले गड्डों में गोबर की खाद मिलाकर 5.0 मि.ली. क्लोरपाईरिफाँस एक लीटर पानी में मिलाकर गड्डों में ड़ालकर गड्डों को पानी से भर दे ताकि दीमक तथा सफेद लट से बचाव हो सके। पौधे किसी प्रमाणित स्रोत से खरीदकर रोपाई करें ।

13.वर्षा की सम्भावना को ध्यान में रखते हुये धान के खेतों की मेंड़ो को मजबुत बनाऐं जिससे ज्यादा पानी खेत में रूक सके। वर्षा को ध्यान मेंरखते हुए किसी भी प्रकार का छिड़काव ना करें।

 

 

लाहकार समिति के वैज्ञानिक   

डा..अनन्ता वशिष्ठ(नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डाप्र. कृष्णन (अध्यक्षकृषि भौतिकी संभाग)

डादेब कुमार दास(प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.सुभाष चन्द्र (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास(प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)

डा.बी.एस.तोमर (अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.दिनेश कुमार(प्रधान वैज्ञानिक,सस्य विज्ञान संभाग) 

डा.पी.सिन्हा(प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग