मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

कृषि भौतिकी संभाग

भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012       

             (दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in         

साल-28, क्रमांक:-35/2021-22/शुक्र.           समय: अपराह्न  2.30 बजे            दिनांक: 30.07.2021

बीते सप्ताह का मौसम (24 से 30 जुलाई, 2021)

    सप्ताह के दौरान आसमान में बादल रहे। 25 जुलाई को 3.4 मि.मी, 26 जुलाई को 10.2 मि.मी, 27 जुलाई को 82.6 मि.मी, 28 जुलाई को 32.8 मि.मी तथा 29 जुलाई को 26.0 मि.मी वर्षा संस्थान की वैधशाला मे दर्ज की गई। दिन का अधिकतम तापमान 28.0 से 36.4 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 34.1 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 25.0 से 28.2 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 27.0 डिग्री सेल्सियस) रहा। इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 87 से 98 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 63 से 95 प्रतिशत दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान दिन में औसत 2.6 घंटे प्रति दिन (साप्ताहिक सामान्य 6.9 घंटे) धूप खिली रही। हवा की औसत गति 3.0 कि.मी. प्रति घंटा साप्ताहिक सामान्य 6.2 कि.मी. प्रति घंटा) तथा वाष्पीकरण की औसत दर 3.0 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 6.7 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न को हवा शांत रही तथा अपराह्न को भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

मौसमी तत्व/दिनांक            

31-07-21

01-08-21

02-08-21

03-08-21

04-08-21

वर्षा (मि.मी.)

15.0

15.0

40.0

20.0

2.0

अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}

32

31

30

31

32

न्यूनतम तापमान {° सेल्सियस}

25

26

25

25

26

बादलों की स्थिति (ओक्टा)

7

6

7

6

4

सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

95

98

98

90

90

सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

70

72

72

68

68

हवा की गति (कि.मी/घंटा)

8

12

15

12

12

हवा की दिशा

 दक्षिण-दक्षिण-पूर्व

 दक्षिण-दक्षिण-पूर्व

पूर्व

 पूर्व-दक्षिण-पूर्व 

 दक्षिण-दक्षिण-पूर्व

साप्ताहिक संचयी वर्षा (मि.मी.)

                         92.0

साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह 04 अगस्त, 2021 तक के लिए कृषि परामर्श सेवाओं,

कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है।

  • कोरोना (कोविड़-19) के गंभीर फैलाव को देखते हुए किसानों को सलाह है कि तैयार सब्जियों की तुड़ाई तथा अन्य कृषि कार्यों के दौरान भारत सरकार द्वारा दिये गये दिशा निर्देशों, व्यक्तिगत स्वच्छता, मास्क का उपयोग, साबुन से उचित अंतराल पर हाथ धोना तथा एक दूसरे से सामाजिक दूरी बनाये रखने पर विशेष ध्यान दें
  • आने वाले पाँच दिनों में मध्यम वर्षा की सम्भावना को देखेते हुये सभी सब्जियों, दलहनी, मक्का तथा पौधशाला में जल निकास का उचित प्रबंन्ध करें। साथ ही सभी फसलों में सिचाई तथा किसी भी प्रकार का छिडकाव ना करें।
  • वर्षा को ध्यान में रखते हुये किसान धान के खेतों की मेंड़ो को मजबुत बनाऐं जिससे ज्यादा से ज्यादा पानी खेत में रूक सके।
  • धान की फसल मे यदि पौधों का रंग पीला पड रहा हो तथा पौधे की ऊपरी पत्तियाँ पीली और नीचे की हरी हो तो इसके लिए जिंक सल्फेट(हेप्टा हाइडेट्र 21%) 0 किग्रा/हैक्टर की दर से 300 लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करें।
  • किसानों को सलाह है कि बाजरा मक्का, सोयाबीन व सब्जियों में खरपतवार नियंत्रण के लिए निराई-गुड़ाई का कार्य शीघ्र करें। सभी दलहनी, मक्का व सब्जियों में जल निकास का उचित प्रबन्ध रखें।
  • यह समय चारे के लिए ज्वार की बुवाई के लिए उप्युक्त हैं अतः किसान पूसा चरी-9, पूसा चरी-6 या अन्य सकंर किस्मों की बुवाई करें। बीज की मात्रा 40 किलोग्राम/हैक्टर रखें ।
  • जिन किसानों की टमाटर, हरी मिर्च, बैंगन व अगेती फूलगोभी की पौध तैयार है, वे मौसम को मध्यनजर रखते हुए रोपाई मेंडों (ऊथली क्यारियों) पर करें तथा जल निकास का उचित प्रबन्ध रखें।
  • इस मौसम में किसान ग्वार (पूसा नव बहार, दुर्गा बहार), मूली (पूसा चेतकी), लोबिया (पूसा कोमल), भिंडी (पूसा ए-4), सेम (पूसा सेम 2, पूसा सेम 3), पालक (पूसा भारती), चौलाई (पूसा लाल चौलाई, पूसा किरण ) आदि फसलों की बुवाई के लिए खेत तैयार हो तो बुवाई ऊँची मेंड़ों पर कर सकते हैं। बीज किसी प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें।
  • इस मौसम में किसान स्वीट कोर्न (माधुरी, विन ऑरेंज) तथा बेबी कोर्न (एच एम-4) की बुवाई कर सकते है।
  • किसान प्रकाश प्रपंश (Light Trap) का भी इस्तेमाल कर सकते है। इसके लिए एक प्लास्टिक के टब या किसी बड़े बरतन में पानी और थोडा मिट्टी का तेल या थोडा रोगोर मिलाकर एक बल्ब जलाकर रात में खेत के बीच में रखे दें। प्रकाश से कीट आकर्षित होकर उसी घोल पर गिरकर मर जायेंगें। इस प्रपंश से अनेक प्रकार के हानिकारक कीटों का नाश होगा।
  • गेदें के फूलों की (पूसा नारंगी) पौध छायादार जगह पर तैयार करें तथा जल निकास का उचित प्रबन्ध रखे।
  • फलों (आम, नीबू तथा अमरुद) के नऐ बाग लगाने के लिए अच्छी गुणवत्ता के पौधों का प्रबन्ध करके इनकी रोपाई शीघ्र करें।
  • वर्षा को ध्यान में रखते हुऐ किसानों को सलाह है कि वे अपने खेतो के किसी एक भाग में वर्षा के पानी को इकट्ठा करने की व्यवस्था करें जिसका उपयोग वे वर्षा न आने के दौरान फसलों की उचित समय पर सिंचाई के लिए कर सकते है

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक 

डा. अनन्ता वशिष्ठ (नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.देब कुमार दास (प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.बी.एस.तोमर (संयुक्त निदेशक प्रसार (कार्यवाहक) एवं अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास (प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)

डा.पी.सिन्हा (प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)

डा. सचिन सुरेश सुरोशे (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)