मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवाएं

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा

कृषि भौतिकी संभाग

भा. कृ. अनु. प. -भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्‍ली – 110012

(दिल्ली और इसके आस-पास के गाँवों के लिए) Website: www.iari.res.in

साल-28, क्रमांक:-85/2021-22/शुक्र.                             समय: अपराह्न  2.30 बजे                                         दिनांक:21-01-2022

बीते सप्ताह का मौसम (15 से 21 जनवरी, 2022)

सप्ताह के दौरान आसमान में बादल रहें। दिन का अधिकतम तापमान 14.4 से 18.0 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 18.2 डिग्री सेल्सियस) तथा न्यूनतम तापमान 6.4 से 9.2 डिग्री सेल्सियस (साप्ताहिक सामान्य 5.9 डिग्री सेल्सियस) रहा। इस दौरान पूर्वाह्न 7.21 को सापेक्षिक आर्द्रता 81 से 97 तथा दोपहर बाद अपराह्न 2.21 को 60 से 85 प्रतिशत दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान दिन में औसत 1.2 घंटे प्रति दिन (साप्ताहिक सामान्य 5.3 घंटे) धूप खिली रही। हवा की औसत गति 2.7 कि.मी. प्रति घंटा (साप्ताहिक सामान्य 3.4 कि.मी. प्रति घंटा) तथा वाष्पीकरण की औसत दर 1.5 मि.मी. (साप्ताहिक सामान्य 2.2 मि.मी) प्रति दिन रही। सप्ताह के दौरान पूर्वाह्न को हवा शांत रही तथा अपराह्न को हवा भिन्न-भिन्न दिशाओं से रही।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केन्द्र, लोदी रोड़, नई दिल्ली से प्राप्त मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान

  मौसमी तत्व/दिनांक            

22-01-22

23-01-22

24-01-22

25-01-22

26-01-22

  वर्षा (मि.मी.)

15.0

4.0

0.0

0.0

0.0

  अधिकतम तापमान {°सेल्सियस}

16

16

17

18

18

  न्यूनतम तापमान {° सेल्सियस}

11

11

07

07

07

  बादलों की स्थिति (ओक्टा)

5

4

4

4

4

  सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) अधिकतम

100

100

95

95

90

  सापेक्षिक आर्द्रता(प्रतिशत) न्यूनतम

80

80

75

75

65

  हवा की गति (कि.मी/घंटा)

25

20

08

10

10

  हवा की दिशा                

दक्षिण-दक्षिण-पूर्व  

 दक्षिण-दक्षिण-पूर्व  

 उत्तर-उत्तर-पश्चिम

उत्तर-उत्तर-पश्चिम

उत्तर-उत्तर-पश्चिम

  साप्ताहिक संचयी वर्षा (मि.मी.)

                                             19.0

  विशेष

22 जनवरी 2022 को तेज हवा 30-40 KMPH के साथ हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है।

साप्ताहिक मौसम पर आधारित कृषि सम्बंधी सलाह 26 जनवरी, 2022 तक के लिए कृषि परामर्श सेवाओं,

कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसानों को निम्न कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है। 

  • कोरोना (कोविड़-19) के गंभीर फैलाव को देखते हुए किसानों को सलाह है कि तैयार सब्जियों की तुड़ाई तथा अन्य कृषि कार्यों के दौरान भारत सरकार द्वारा दिये गये दिशा निर्देशों, व्यक्तिगत स्वच्छता, मास्क का उपयोग, साबुन से उचित अंतराल पर हाथ धोना तथा एक दूसरे से सामाजिक दूरी बनाये रखने पर विशेष ध्यान दें
  • आने वाले दिनों में वर्षा की संभावना को देखते हूए किसानों को सलाह है कि वे सभी खड़ी फसलों व सब्जियों में सिंचाई न करें तथा किसी भी तरह का छिड़काव ना करें।
  • मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानो को सलाह है कि सरसों की फसल में चेंपा कीट की निरंतर निगरानी करते रहें। प्रारम्भिक अवस्था में प्रभावित भाग को काट कर नष्ट कर दे।
  • चने की फसल में फली छेदक कीट की निगरानी हेतु फीरोमोन प्रपंश @ 3-4 प्रपंश प्रति एकड़ खेतों में लगाएं जहां पौधों में 25-35% फूल खिल गये हों। “T” अक्षर आकार के पक्षी बसेरा खेत के विभिन्न जगहों पर लगाए।
  • कद्दूवर्गीय सब्जियों के अगेती फसल की पौध तैयार करने के लिए बीजों को छोटी पालीथीन के थेलों में भर कर पाली घरों में रखें।
  • इस मौसम में तैयार बन्दगोभी, फूलगोभी, गांठगोभी आदि की रोपाई मेड़ों पर कर सकते हैं।
  • इस मौसम में पालक, धनिया, मेथी की बुवाई कर सकते हैं। पत्तों के बढ़वार के लिए 20 कि.ग्रा. यूरिया प्रति एकड़ की दर से छिड़काव कर सकते हैं।
  • मौसम को ध्यान में रखते हुए किसानों को सलाह है कि वे आलू तथा टमाटर में पछेता झूलसा रोग की निरंतर निगरानी करते रहें तथा प्रारम्भिक लक्षण दिखाई देने पर इंडोफिल-एम-45 @ 2 मिली\लीटर पानी या मेन्कोजेब 2.0 ग्राम\लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव आसमान साफ होने पर करें।
  • इस मौसम में तैयार खेतों में प्याज की रोपाई करें। रोपाई वाले पौध छ: सप्ताह से ज्यादा की नही होने चाहिए। पौधों को छोटी क्यारियों में रोपाई करें। रोपाई से 10-15 दिन पूर्व खेत में 20-25 टन सड़ी गोबर की खाद डालें। 20 कि.ग्रा. नत्रजन, 60-70 कि.ग्रा. फ़ॉस्फोरस तथा 80-100 कि.ग्रा. पोटाश आखिरी जुताई में ड़ालें। पौधों की रोपाई अधिक गहराई में ना करें तथा कतार से कतार की दूरी 15 से.मी. पौधे से पौधे की दूरी 10 से.मी. रखें।
  • गोभीवर्गीय फसल में हीरा पीठ इल्ली, मटर में फली छेदक तथा टमाटर में फल छेदक की निगरानी हेतु फीरोमोन प्रपंश @ 3-4 प्रपंश प्रति एकड खेतों में लगाएं।
  • गेंदे की फसल में पूष्प सड़न रोग के आक्रमण की निगरानी करते रहें। यदि लक्षण दिखाई दें तो बाविस्टिन 1 ग्राम/लीटर अथवा इन्डोफिल-एम 45 @ 2 मिली./लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव आसमान साफ होने पर करें।

सलाहकार समिति के वैज्ञानिक 

डा. अनन्ता वशिष्ठ (नोड़ल अधिकारी, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.प्र. कृष्णन (अध्यक्ष, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.देब कुमार दास (प्रधान वैज्ञानिक, कृषि भौतिकी संभाग)

डा.बी.एस.तोमर (संयुक्त निदेशक प्रसार (कार्यवाहक) एवं अध्यक्ष, सब्जी विज्ञान संभाग)

डा.जे.पी.एस. ड़बास (प्रधान वैज्ञानिक व इंचार्ज, केटेट)

डा.दिनेश कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, सस्य विज्ञान संभाग)

डा.पी.सिन्हा (प्रधान वैज्ञानिक, पादप रोग संभाग)

डा. सचिन सुरेश सुरोशे (प्रधान वैज्ञानिक, कीट विज्ञान संभाग)