सोया तेल की शेल्फ लाइफ एवं पोषण गुणवत्ता में सुधार
सोया तेल में लगभग 20–30% ओलिक अम्ल तथा 50–55% लिनोलिक अम्ल होता है। सोया तेल की शेल्फ लाइफ और पोषण गुणवत्ता बढ़ाने के लिए बहु-असंतृप्त वसीय अम्ल (लिनोलिक अम्ल) की मात्रा कम करना तथा साथ ही एकल-असंतृप्त वसीय अम्ल (मुफा/MUFA) यानी ओलिक अम्ल की मात्रा बढ़ाना वांछनीय है। इस उद्देश्य से सोयाबीन बीज से फैड(fad2-1) जीन को पृथक कर उसका वर्णन किया गया है। इसके सेंस एवं एंटी-सेंस कंस्ट्रक्ट उपयुक्त वेक्टर में तैयार किए जा रहे हैं, जिनका उपयोग आगे चलकर कम लिनोलिक अम्ल वाले ट्रांसजेनिक सोयाबीन विकसित करने में किया जा सकता है।
डिज़ाइन्ड ऑयल के जैवसंश्लेषण हेतु लिपिड चयापचय से जुड़े जीनों का पृथक्करण एवं वर्णन
पौधे बीजों में ऊर्जा का भंडारण ट्राइएसिलग्लिसरॉल के रूप में करते हैं। ट्राइएसिलग्लिसरॉल के संश्लेषण में संलग्न जीन को Brassica juncea से पृथक कर उसका वर्णन किया गया है। कुछ जीन अपने सब्सट्रेट के प्रति अत्यधिक विशिष्ट होते हैं; ऐसे जीनों का उपयोग तेल जैवसंश्लेषण के आनुवंशिक संशोधन में कर विशिष्ट वसीय अम्ल संयोजन वाले डिज़ाइन्ड ऑयल प्राप्त किए जा सकते हैं, जो विभिन्न औद्योगिक उपयोगों के लिए उपयुक्त होंगे। ऐसे तेलों की औद्योगिक मांग अधिक होगी और अंततः किसानों की आय में वृद्धि होगी।
फसली पौधों की CO (कार्बन मोनोऑक्साइड) के प्रति संवेदनशीलता
(सी 4)C4 फसलें (जैसे मक्का/कॉर्न) प्रदूषकों, विशेषकर कार्बन मोनोऑक्साइड, के प्रति (सी 3)C3 फसलों (जैसे गेहूँ, धान) की तुलना में अधिक संवेदनशील होती हैं। इसलिए शहरी क्षेत्रों तथा अत्यधिक उपयोग वाले राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास (सी 4)C4 फसलों की खेती से बचना एक उपयोगी अभ्यास हो सकता है, जो किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।