1960 के दशक में देश “शिप-टू-माउथ” स्थिति का सामना कर रहा था। 1966 में, भारत के 3 करोड़ लोग भोजन प्राप्त करने में “गंभीर संकट” से गुजर रहे थे। यदि ग्रीन क्रांति न होती, तो भारत जनसंख्या विस्फोट से बच नहीं पाता। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली, भारत की ‘ग्रीन क्रांति’ और “मानव संसाधन विकास” का केंद्र रहा है, जिसने देश की खाद्य सुरक्षा और विकास में अत्यंत महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। IARI देश की खाद्य, पोषण, पर्यावरण और आजीविका सुरक्षा के लिए सतत “एवरग्रीन रेवोल्यूशन” लाने के प्रयास जारी रखे हुए है। पिछले 115 वर्षों में, IARI ने राष्ट्र की आवश्यकताओं और चुनौतियों का गतिशील रूप से सामना किया है तथा भारतीय कृषि में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने के लिए मानव संसाधन और प्रौद्योगिकियाँ प्रदान की हैं।
• ICAR-IARI की नीम कोटेड यूरिया तकनीक को भारत में उर्वरक उद्योग ने पूरी तरह अपना लिया है (सरकारी अधिसूचना दिनांक 25.05.2015), और 1 सितंबर 2015 से देश में उत्पादित 100% यूरिया नीम कोटेड है। 1 मार्च 2018 को, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (DAC&FW) ने परंपरागत 50 किलोग्राम बैग की जगह 45 किलोग्राम यूरिया बैग का MRP अधिसूचित किया। इस प्रकार, IARI की नीम कोटेड यूरिया तकनीक देश में बेचे जाने वाले प्रत्येक बैग पर 5 किलोग्राम यूरिया बचाती है। इससे मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार, कीटनाशक उपयोग में कमी, कीट एवं रोगों के प्रकोप में कमी तथा विभिन्न फसलों की उपज में वृद्धि हुई है।