सभी कृषि-संबंधित सूचनाओं, विशेषकर विपणन सूचना, के लिए ग्राम सूचना केंद्र (VIC) की स्थापना।
किसानों के योगदान/पंचायत निधि से रेडियो, टेलीविजन, टेलीफोन/STD, इंटरनेट सुविधाओं सहित ग्राम सूचना केंद्र/ज्ञान केंद्रों का निर्माण एवं सुसज्जन।
राज्य स्तर पर विपणन बुद्धिमत्ता/सूचना विश्लेषण हेतु अवसंरचना (SAUs/विपणन विभागों आदि में यूनिट/सेल्स का गठन), विशेषकर राज्य की महत्वपूर्ण फल-सब्ज़ियों के लिए; इन सेल्स में प्रोसेसर, परिवाहक, विपणन से जुड़े संघों हेतु आवश्यक सूचनाएँ भी हों।
सरकारी निगरानी में निजी सामुदायिक टीवी/रेडियो स्टेशन (लगभग 30 किमी त्रिज्या तक) को प्रोत्साहन—कृषि आदान-प्रदान एवं विपणन सूचना हेतु; इन्हें विपणन बुद्धिमत्ता यूनिट/सेल्स से जोड़ना।
विपणन बुद्धिमत्ता यूनिट/सेल्स को AGMARKNET से जोड़ना।
विपणन सूचना यूनिट/सेल्स को ग्राम सूचना केंद्र, APMC में PRO, सामुदायिक टीवी/रेडियो, KVK, AEZ एवं किसान कॉल सेंटर से—सीधे या जिला विपणन अधिकारी (DMO) अथवा जिला कृषि/उद्यान अधिकारी (DAO/DHO) के माध्यम से जोड़ना।
संचार दृश्य (विज़ुअल) पर किए गए अध्ययनों से यह संकेत मिला कि तस्वीरों और रेखाचित्रों के माध्यम से किसान संदेशों को अधिक आसानी और स्पष्टता से समझते हैं। कृषि विस्तार संगठनों में खेतिहर महिलाओं की मेहनत (ड्रजरी) कम करने हेतु 13 प्रशिक्षण एवं प्रबंधन मॉड्यूल डिज़ाइन एवं मानकीकृत किए गए हैं।
प्रौद्योगिकी आकलन एवं परिष्करण (TAR) के अंतर्गत इंस्टीट्यूट विलेज लिंकेज प्रोग्राम (IVLP) एवं फ्रंट लाइन डिमॉन्स्ट्रेशन (FLD) के माध्यम से यह पाया गया कि अल्प अवधि की धान किस्म ‘पूसा सुगंध-4’ ने कम उपज के बावजूद ‘PRH-10’, ‘पूसा सुगंध-2’ और ‘पूसा सुगंध-3’ की तुलना में बेहतर गुणवत्ता, बाज़ार-अनुकूलता और अधिक बाज़ार मूल्य के कारण अधिक लाभ दिया।
अंतर-फसली कार्यों में खेतिहर महिलाओं की ड्रजरी घटाने हेतु व्हील हैंड हो के उपयोग से पारंपरिक औज़ारों की तुलना में प्रति इकाई समय 3–4 गुना अधिक क्षेत्र कवर हुआ। 200 से अधिक महिलाओं ने इसे आपस में साझा करके उपयोग किया। मशीन से निर्मित पूर्ण फीड ब्लॉक राशन के उपयोग से दुधारू पशुओं के उत्पादक एवं प्रजनन स्वास्थ्य तथा दूध उत्पादन में सुधार की प्रवृत्तियाँ देखी गईं।
राजस्थान के झुंझुनूं जिले में आउटरीच एक्सटेंशन कार्यक्रम के अंतर्गत ओरोबैंकी (Orobanche)—एक परजीवी खरपतवार—सरसों की फसल के लिए पिछले 5–6 वर्षों में गंभीर समस्या बन गई है, जिससे 40–90% तक क्षति होती है। यह तंबाकू, जीरा, मूली, गाजर, टमाटर, बैंगन आदि फसलों को भी प्रभावित करती है। भा. कृ. अनु. सं. ने इस समस्या के समाधान हेतु मिशन मोड में पहल की है।
संस्थान का कृषि प्रौद्योगिकी सूचना केंद्र (ATIC) किसानों/उद्यमियों को उत्पादों, सेवाओं एवं प्रौद्योगिकियों के लिए ‘सिंगल विंडो डिलीवरी सिस्टम’ प्रदान करता है—जिसमें सूचना, संग्रहालय, प्रदर्शनी, पुस्तकालय, प्लांट क्लिनिक तथा क्रॉप कैफेटेरिया में जीवंत प्रदर्शन शामिल हैं। हज़ारों किसान एवं विदेशी आगंतुक दौरे, टेलीफोनिक हेल्पलाइन (011-5841670), टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर (1551), फार्म बुलेटिन आदि के माध्यम से लाभान्वित होते हैं।